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HIV को ह्यूमन इम्यून डिफिशिएंसी वाइरस के नाम से जाना जाता है। इस वायरस की वजह से ही कोई व्यक्ति HIV से संक्रमित होता है। यह एक संक्रामक बिमारी है, जो रोगी के इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) पर असर डालती है और इसे कमजोर बना देती है। एड्स (AIDS) को अक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम (Acquired immunodeficiency syndrome) के नाम से जाना जाता है। जब HIV का संक्रमण बहुत अधिक हो जाता है या HIV आखरी अवस्था में पहुंच जाता है तब HIV एड्स में परिवर्तित हो जाता है।

हमारे भारत देश में गाय को कितनी मानता दी जाती है, यह बात हर कोई जानता है। गाय को भारत में गाय माता के रूप में जाना जाता है। गाय एक शाकाहारी और घरेलू पशु है, जिसका दूध हमारे शरीर के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद होता है। गाय को सभी जानवरों में से पवित्र पशु के रूप में माना जाता है।

पूरे संसार में गाय की 800 प्रजातियां पायी जाती हैं। गाय से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। अभी हाल ही में एक रिसर्च में बताया गया है कि गाय के अंदर HIV यानि एड्स से लड़ने की ताकत होती है। आपको बता दें कि जानवरों में किसी भी बीमारी से लड़ने की क्षमता इंसानों से कई गुणा ज्यादा होती है। ऐसे में उनकी इस क्षमता को इंसानों के लिए उपयोगी बनाने के लिए वैज्ञानिक लगातार खोज कर रहे हैं।

अभी कुछ दिनों पहले एक नई रिसर्च ने इस बात का खुलासा किया कि गाय के अंदर HIV यानि एड्स से लड़ने की ताकत पायी जाती है। वैसे तो जानवरों में मनुष्यों से कई गुना अधिक किसी भी बीमारी से लड़ने की क्षमता पायी जाती है। ऐसे में जानवरों की इस क्षमता को इंसानों के लिए उपयोगी बनाने में वैज्ञानिक लगातार लगे हुए हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों द्वारा इस बात का पता लगाया गया है कि गाय में HIV से लड़ने की क्षमता पायी जाती है।

इस रिसर्च को ‘द यूएस नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ’ ने अंजाम दिया है। रिसर्च के अनुसार यह बात सामने आई है कि गाय में HIV से लड़ने की क्षमता बहुत अधिक होती है, क्योंकि गाय की इम्यून पावर बहुत अच्छी होती है, जो इस खतरनाक बीमारी के कीटाणुओं को 30 से 40 दिनों में ख़त्म कर देती है। रिसर्च के अनुसार, यह बात सामने आई है कि 100 में से सिर्फ 10 लोगो में ही HIV से लड़ने की क्षमता होती है।

हालांकि उनका शरीर भी उपचार के 2 साल बाद HIV से लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। रिसर्च के अनुसार, मनुष्यों के शरीर में एड्स का पता लगाने में लगभग 2 साल का समय लग जाता है। इसका कारण नयूट्रीलाइसिंग एंटीबॉडीज को माना जाता है। यह धीरे-धीरे शरीर में फैलते हैं और लगभग 2 साल में इसका असर दिखने लगता है और तब तक इसके इलाज या रोकथाम का समय निकल चुका होता है। रिसर्च के अनुसार, आने वाले समय में इंसान भी एड्स से लड़ने में सक्षम हो पायेगा।

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