गुजरात चुनाव से पहले पाटीदार को पोटने की तैयारी

उन्होंने कहा कि 136 और मुकदमे वापस लिये जाने का फैसला हो चुका है और यह प्रक्रिया इस सप्ताह पूरी हो जायेगी। इस तरह अब तक कुल 235 केस वापस लेने का फैसला हो चुका है।

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गांधीनगर । गुजरात में विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही राज्य की बीजेपी सरकार पाटीदार को पोट लेना चाहती है। राज्य सरकार ने पाटीदार आरक्षण आंदोलन से जुड़े 139 और मुकदमों को वापस लेने का फैसला किया है। इसके अलावा राज्य सरकार ने आठ लाख से अधिक कर्मियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता बढ़ाने समेत कई लोकलुभावन घोषणाएं की है। डिप्टी सीएम नीतिन पटेल ने गृह तथा कानून विभाग के राज्य मंत्री प्रदीप जाडेजा के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन की। उन्होंने कहा कि पाटीदार समाज के साथ सरकार की पिछले महीने हुई  बैठक से पहले तक 109 आंदोलन संबंधी केस वापस लिये गये थे। उन्होंने कहा कि 136 और मुकदमे वापस लिये जाने का फैसला हो चुका है और यह प्रक्रिया इस सप्ताह पूरी हो जायेगी। इस तरह अब तक कुल 235 केस वापस लेने का फैसला हो चुका है।

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उन्होंने बताया कि रेलमंत्री पीयूष गोयल को भी रेलवे की संपत्ति को नुकसान संबंधी मुकदमे वापस लेने के लिए पत्र लिखा है। रेल मंत्रालय से भी जल्द ही ऐसे केस वापस लेने की अनुमति मिल सकती है। उन्होंने बताया कि गंभीर हिंसा से जुड़े और सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर के मुकदमों को छोड़ कर सभी केसों को वापस लिया जायेगा। पाटीदार आंदोलन से जुड़े लगभग 439 मुकदमें दर्ज किये गये हैं। उन्होंने कहा कि एक मुकदमा वापस लेने से करीब 20 से 25 लोग आरोप मुक्त हो रहे हैं। प्रदीप जाडेजा ने बताया कि 42 बड़े मुकदमों को छोड़ अन्य सभी को वापस लेने की प्रक्रिया जारी है, इस संबंध में दो तीन दिन में बाकी की प्रक्रिया भी पूरी हो जायेगी।

बता दें कि 136 मुकदमों में पाटीदार आंदोलन के मुखिया हार्दिक पटेल से जुड़े मुकदमे भी हैं। इसमे  राजकोट में अक्टूबर 2015 में भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच क्रिकेट मैच के दौरान विरोध प्रदर्शन करते हुए तिरंगे का कथित अपमान करने का मुकदमा भी शामिल है। हार्दिक पटेल को उस मामले में गिरफ्तार भी किया गया था। हार्दिक पटेल पर दर्ज राजद्रोह के मुकदमों तथा अन्य गंभीर आरोपों की वापसी के बारे में पटेल ने साफ किया है कि आने वाले समय में राज्य में शांति बनी रहने पर सरकार इस बारे में केंद्र सरकार से आग्रह कर सकती है।

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