Janhvi Kapoor Career: कभी-कभी लगता है बॉलीवुड में हिट फिल्म पाना किसी टॉप एग्जाम पास करने से भी ज्यादा मुश्किल है। और अगर बात जान्हवी कपूर की हो, तो उनके लिए ये सफर और भी लंबा हो गया है। सात साल से वो लगातार कोशिश कर रही हैं कि एक ऐसी फिल्म आए जो बॉक्स ऑफिस पर गूंजे, लेकिन अब तक हर फिल्म या तो औसत रही या सीधे फ्लॉप लिस्ट में जा बैठी।
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अब इस हफ्ते उनकी और सिद्धार्थ मल्होत्रा की नई फिल्म ‘परम सुंदरी’ रिलीज हो चुकी है, वो भी बिल्कुल सोलो रिलीज के साथ, यानी मैदान खाली है। त्योहार का समय भी है, माहौल भी पॉजिटिव है, लेकिन सवाल ये है कि क्या ये फिल्म जान्हवी के करियर को वो रफ्तार दे पाएगी, जिसका इंतजार वो सालों से कर रही हैं?
सात साल में छह फिल्में, और अब तक कोई सुपरहिट नहीं! Janhvi Kapoor Career
बात 2018 की है। जान्हवी कपूर ने ‘धड़क’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। श्रीदेवी की बेटी होने के नाते लोगों की नजरें पहले से ही उन पर थीं। ‘धड़क’ बॉक्स ऑफिस पर सेमी-हिट साबित हुई, और सबको लगा कि अब जान्हवी लंबी रेस की खिलाड़ी साबित होंगी।
लेकिन इसके बाद जान्हवी की फिल्में आईं – रूही, मिली, मिस्टर एंड मिसेज माही, उलझन… और इन सबका हाल एक जैसा ही रहा फ्लॉप या औसत से भी नीचे।
इकलौती फिल्म जो बड़ी बनी, वो थी ‘देवरा: पार्ट 1’, लेकिन उसका भी हिंदी वर्जन सिर्फ 62 करोड़ तक ही सिमट गया। मतलब ये कि जान्हवी अब तक बॉक्स ऑफिस की हिट लिस्ट में दाखिल नहीं हो पाई हैं।
‘परम सुंदरी’ की कहानी – दिल वाला लड़का, सुंदरी वाली लड़की
अब आते हैं इस हफ्ते की नई पेशकश ‘परम सुंदरी’ पर। कहानी कुछ यूं है – परम (सिद्धार्थ मल्होत्रा) एक अमीर खानदान का बेटा है, जिसे अपने स्टार्टअप के लिए पापा से फंड चाहिए। लेकिन पापा यानी संजय कपूर उसे शर्त देते हैं, एक महीने में अपनी डेटिंग ऐप से लड़की ढूंढो और अगर रिश्ता टिक गया, तो पैसे मिल जाएंगे।
परम पहुंचता है केरल, और वहां मिलती है सुंदरी (जान्हवी कपूर)। शुरू होता है एक फनी-रोमांटिक ड्रामा, जहां दिखाया गया है कि कैसे एक झूठा रिश्ता सच में बदल जाता है।
पहला हाफ थोड़ा एंटरटेनिंग है थोड़ा रोमांस, थोड़ा मस्ती। लेकिन दूसरे हाफ में फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ जाती है और दर्शक सीट पर करवटें लेने लगते हैं।
डायरेक्शन में चूक, स्टोरी में दम नहीं
डायरेक्टर तुषार जलोटा ने फिल्म को बहुत ही क्लिशे तरीके से पेश किया है। नॉर्थ-साउथ कल्चर का मिक्स तो दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन कुछ सीन इतने ओवर-द-टॉप और अनकंफर्टेबल हैं कि हंसी नहीं, बल्कि माथा पकड़ने का मन करता है।
केरल की खूबसूरती जरूर कैमरे में कैद की गई है, लेकिन संवेदनशील मुद्दों पर फूहड़ता भारी पड़ जाती है। नर्स का रोल, चर्च में डांस, और कुछ डायलॉग्स कॉमेडी की जगह क्रिंज फील कराते हैं।
जान्हवी या सिद्धार्थ – किसका चला जादू?
सिद्धार्थ मल्होत्रा इस फिल्म में अपनी क्यूटनेस और लुक्स से दिल जीतने की कोशिश करते हैं, और काफी हद तक कामयाब भी रहते हैं। एक्टिंग भी उन्होंने ठीक-ठाक की है।
जान्हवी कपूर की बात करें तो फिल्म का टाइटल भले ही ‘परम सुंदरी’ है, लेकिन उनका किरदार उतना मजबूत या दमदार नहीं दिखाया गया है। एक लव स्टोरी की लीड अगर इमोशनली कमजोर हो, तो वो कहानी पर असर डालती है और यहीं पर फिल्म चूक जाती है।
मनजोत सिंह ने हीरो के दोस्त के रोल में थोड़ी कॉमिक राहत दी है। बाकी सपोर्टिंग कास्ट ठीक-ठाक है।
बॉक्स ऑफिस पर क्या चलेगी फिल्म?
फिल्म को कोई बड़ी टक्कर नहीं मिल रही है, ये इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है। लेकिन जब एडवांस बुकिंग से लेकर सोशल मीडिया बज़ तक सब कुछ ठंडा हो, तो ये फायदा कितना टिकेगा, कहना मुश्किल है।
फिल्म का फाइनल नज़रिया
वहीं, ‘परम सुंदरी’ देखने के बाद आपको कई फिल्मों की याद आएगी जैसे ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘चेन्नई एक्सप्रेस’, ‘कुली नंबर 1’… लेकिन उनमें जो स्पार्क था, वो यहां मिसिंग है।
अगर आप जान्हवी के फैन हैं या फिर हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो एक बार देख सकते हैं। लेकिन कुछ नया या दमदार ढूंढ रहे हैं, तो निराशा हाथ लग सकती है।