Who is Urjit Patel: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल को इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, उर्जित पटेल को आईएमएफ में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर तीन साल के लिए नियुक्त किया गया है। ये पद न केवल उनकी विशेषज्ञता को मान्यता देता है, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक उपस्थिति को और मज़बूत करता है।
आरबीआई गवर्नर के तौर पर अहम भूमिका– Who is Urjit Patel
उर्जित पटेल 2016 में रघुराम राजन के बाद RBI के 24वें गवर्नर बने थे। उनका कार्यकाल भले ही लंबा न रहा हो, लेकिन उन्होंने उस दौरान कई बड़े और चर्चित फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नोटबंदी, यानी 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने का ऐतिहासिक फैसला उन्हीं के कार्यकाल में लिया गया था।
इसके अलावा, महंगाई दर को लेकर एक अहम नीति भी उनके कार्यकाल में लागू की गई। उन्होंने 4% सीपीआई (CPI – उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) को महंगाई का लक्ष्य तय किया, जिसके तहत मुद्रास्फीति को 4 फीसदी के आसपास रखने की नीति बनाई गई। ये कदम भारतीय मौद्रिक नीति में एक बड़ा बदलाव था और आज भी यही लक्ष्य आरबीआई की पॉलिसी निर्धारण का हिस्सा है।
अचानक इस्तीफा और चर्चा
दिसंबर 2018 में उर्जित पटेल ने व्यक्तिगत कारणों से आरबीआई गवर्नर के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने ऐसा करने वाले पहले गवर्नर के रूप में इतिहास रचा, और उनका कार्यकाल 1992 के बाद सबसे छोटा रहा। हालांकि उनके इस्तीफे के पीछे कई तरह की चर्चाएं रहीं, लेकिन उन्होंने हमेशा इसे निजी फैसला बताया।
पहले भी IMF का हिस्सा रहे
यह पहला मौका नहीं है जब उर्जित पटेल IMF से जुड़े हैं। 1990 के दशक में उन्होंने वाशिंगटन डीसी स्थित IMF हेडक्वार्टर में काम किया था, और बाद में 1992 में IMF के डिप्टी रेप्रेजेंटेटिव के तौर पर नई दिल्ली में तैनात हुए थे। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संस्थाओं के साथ उनके अनुभव ने ही शायद उन्हें यह नई भूमिका दिलाई।
सरकारी और निजी क्षेत्र में भी निभाई अहम जिम्मेदारी
उर्जित पटेल ने सरकारी क्षेत्र में वित्त मंत्रालय के सलाहकार (1998-2001) के रूप में भी सेवाएं दी हैं। साथ ही, उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज, IDFC लिमिटेड, MCX लिमिटेड, और गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन जैसी बड़ी कंपनियों में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।
शिक्षा और विशेषज्ञता
अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड भी काफ़ी प्रभावशाली है। उन्होंने लंदन यूनिवर्सिटी से बीएससी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एम.फिल और येल यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की है। यह उनकी मजबूत आर्थिक समझ और वैश्विक समझ को दर्शाता है।