मुंबई। आरबीआई ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए बैंकों की ओर से एलओयू यानि लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग जारी करने की परंपरा को खत्म कर दिया है। आरबीआई द्वारा ये फैसला पिछले महीने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में उजागर हुए फर्जीवाड़े को देखते हुए लिया गया है। आरबीआई ने इसको लेकर एक अधिसूचना भी जारी की है, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

आरबीआई ने मंगलवार को जारी अधिसूचना में कहा है, “अधिकृत कैटेगरी-1 के बैंकों द्वारा भारत में आयात के मद्देनजर कारोबारी साख के लिए एलओयू/ सहूलियत पत्र यानि लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग जारी करने की परंपरा रद्द करने का फैसला लिया गया है”।

हालांकि आरबीआई ने कहा है कि व्यापार साख के लिए साख पत्र व बैंक गारंटी विनियनों के अनुपालन के अधीन जारी रह सकता है।

बता दें कि हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने पीएनबी द्वारा जारी किए गए एलओयू का उपयोग करके कथित तौर पर पीएनबी को 12,700 करोड़ रुपये का चूना लगाया था।

ऐसे हुआ था PNB घोटाला 

हीरा कारोबारी नीरव मोदी को विदेशों से हीरे खरीदने के लिए पैसों की जरूरत थी। चूंकि हीरे डॉलर में खरीदने थे, ऐसे में उसे FCL यानि फॉरेन करेंसी लोन की जरूरत थी, लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत ये थी कि कोई भी विदेशी बैंक उसे क्यों लोन देगा और किस आधार पर देगा, क्योंकि वो तो नीरव मोदी को जानते नहीं हैं।

ऐसे में नीरव मोदी ने एक प्लान बनाया और लोन के लिए वो पंजाब नेशनल बैंक के पास गये और उनसे कहा कि हमें विदेशों से हीरा खरीदने के लिए लोन की जरूरत है, ऐसे में आप (PNB) हमें विदेशों से लोन दिलाने के लिए LoU यानि लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करने की कृपा करें।

यहां आपको बता दें कि LoU एक तरह की बैंक गारंटी होती है, जिसके जरिये बैंक अपने ग्राहक का लोन बिना किसी शर्त के भरने की सहमति देता है। LoU का फायदा ये होता है कि ग्राहक उसे दिखाकर विदेश में मौजूद भारतीय बैंकों से आसानी से लोन हासिल कर सकता है और वो भी सस्ते दरों पर।

अब बैंकों के नियमों की मानें तो ग्राहकों को LoU जारी करने से पहले उससे 100 फीसदी की गारंटी लेनी होती है। मान लें कि ग्राहक को अगर बैंक से 100 करोड़ का लोन चाहिए तो उसे पहले 110 करोड़ के सामान की गारंटी देनी होगी, उसके बाद ही बैंकों द्वारा लोन पास किया जाता है। लेकिन नीरव मोदी के केस में ऐसे किसी भी नियम को बैंक द्वारा फॉलो नहीं किया गया और उसे विदेशों से लोन के लिए LoU जारी कर दिया गया।

इसके बाद विदेशी बैंक नीरव मोदी को लोन जारी करने के लिए राजी हो गया, क्योंकि पंजाब नेशनल बैंक ने उस लोन को चुकाने की गारंटी दी थी। पीएनबी ने विदेशी बैंक को SWIFT सिस्टम के जरिये एक मैसेज भेजा कि नीरव मोदी को 180 दिनों के लिए उसकी गारंटी पर 100 करोड़ का लोन दिया जाए।

अब यहां ये समझने की जरूरत है कि SWIFT क्या होता है ? दरअसल SWIFT यानि सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंनशियल टेलीकम्यूनिकेशंस, एक प्रकार का मैसेजिंग सिस्टम होता है जिसके तहत दुनियाभर के बैंक एक-दूसरे को पैसा भेज सकते हैं।

अब चूंकि भारत के एक प्रतिष्ठित बैंक ने लोन की गारंटी ली थी, इसलिए विदेशी बैंक ने तुरंत ही लोन पास कर दिया। साथ ही पीएनबी ने विदेशी बैंक से ये भी कहा कि अगर नीरव मोदी इस लोन को नहीं चुका पाते हैं, ऐसी स्थिति में पीएनबी उस लोन को चुकाएगा। इसके बाद विदेशी बैंक ने लोन के तहत पीएनबी के Nostro एकाउंट (Nostro वो एकाउंट होता है, जिसमें कोई बैंक विदेशों में लेन-देन करता है) में पैसा भेज दिया, जिसके बाद पीएनबी ने उस पैसों को नीरव मोदी को दे दिया और ये सिलसिला लगातार चलता रहा।

वैसे आमतौर पर लोन चुकाने के लिए ग्राहक को 90 दिनों का समय दिया जाता है, लेकिन पंजाब नेशनल बैंक नीरव मोदी पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गया और उसे लोन चुकाने के लिए एक साल का समय दे दिया, जो कि नियमों के बिल्कुल खिलाफ था। लेकिन इसके बावजूद भी नीरव मोदी ने लोन के पैसे नहीं चुकाए। ऐसे में पीएनबी को चाहिए था कि वो नीरव मोदी को लोन डिफॉल्टर घोषित करे लेकिन बावजूद इसके वो उसे नये LoU जारी करता रहा, जिसकी बदौलत उसे लोन पर लोन मिलते गये।

जानकारी के मुताबिक नीरव मोदी को सारे LoU मुंबई के ब्रैडी हाउस ब्रांच से जारी किए गए थे। पीएनबी के इस पूरे फर्जीवाड़े का सूत्रधार ब्रैडी हाउस ब्रांच का पूर्व डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी को माना जा रहा है। इसी ने नीरव मोदी को फर्जी LoU जारी कराये थे। गोकुलनाथ शेट्टी मई 2017 में बैंक से रिटायर हो गया था।

इसके बाद फिर नीरव मोदी की कंपनी की ओर से पीएनबी से आग्रह किया गया कि वो कंपनी के लिए LoU जारी करे जिससे कि वो विदेशों से हीरे की खरीदारी कर सकें। अब चूंकि गोकुलनाथ शेट्टी तो वहां से रिटायर हो चुका था, ऐसे में बैंक की ओर से लोन के बदले 100 फीसदी गारंटी की मांग की गई, लेकिन नीरव मोदी की कंपनी को पहले से ही फर्जी LoU ले रही थी, ऐसे में कंपनी की ओर से कहा गया कि वो तो काफी समय से इस सुविधा का लाभ ले रहे हैं।

इसके बाद पीएनबी ने रिकॉर्ड चेक किए तो उन्हें ऐसी कोई भी कागजात नहीं मिली जिससे ये साबित हो सके कि नीरव मोदी की कंपनी को LoU जारी किये गये थे। इस छोटी सी मगर गंभीर सूचना से पीएनबी का माथा ठनका, जिसके बाद बैंक ने अपनी जांच को आगे बढ़ाया तो उन्हें इस मामले में बड़ी जालसाजी नजर आई। जांच के दौरान पता चला कि ब्रैडी हाउस ब्रांच के दो कर्मचारी गोकुलनाथ शेट्टी और मनोज खराट ने फर्जी तरीके से नीरव मोदी की कंपनी को LoU जारी किये थे। जांच में ये भी पता चला कि वो 2011 से ही कंपनी को फर्जी LoU जारी कर रहा था। इन LoU का बैंक के पास कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था।