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India-UK Free trade deal: भारत-यूके के बीच फ्री ट्रेड डील: अब दवाइयां, फैशन और इलेक्ट...

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India-UK Free trade deal: आज का दिन भारत और ब्रिटेन के लिए एक ऐतिहासिक पल साबित हुआ। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम किएर स्टार्मर ने लंदन में एक अहम फ्री ट्रेड डील (FTA) पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में नया मोड़ लाएगा। इस समझौते से दोनों देशों में व्यापार बढ़ेगा, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, यह डील दुनियाभर में दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करेगी।

दोनों देशों के आम नागरिकों के लिए यह डील फायदेमंद साबित होगी। दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और फैशन से जुड़े सामान सस्ते हो जाएंगे। हालांकि, कुछ चीजें महंगी भी हो सकती हैं, जिसका असर खासकर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।

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FTA की शुरुआत: एक लंबी यात्रा का परिणाम- India-UK Free trade deal

यह फ्री ट्रेड डील की शुरुआत जनवरी 2022 में हुई थी, जब ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस पर चर्चा की थी। हालांकि, इसे पहले 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब यह डील समय से पहले संपन्न हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील के बारे में बात करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था में उछाल आएगा। साथ ही, रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

क्या होता है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट?

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) एक समझौता होता है, जो दो या दो से ज्यादा देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। इसके तहत, दोनों देशों के उत्पादों पर टैरिफ (कर) को कम किया जाता है या हटा दिया जाता है, ताकि व्यापार में आसानी हो। इसका मुख्य उद्देश्य देशों के बीच व्यापार को सरल बनाना और उनके बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करना होता है।

भारत-यूके FTA का असर क्या होगा?

भारत और यूके के बीच हुआ यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट खास है, क्योंकि इससे भारत को अपनी 99 फीसदी एक्सपोर्ट उत्पादों पर यूके में टैक्स फ्री एक्सपोर्ट मिलेगा। वहीं, ब्रिटेन से आने वाले 90 फीसदी उत्पादों पर टैक्स कम किया जाएगा या हटा दिया जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों और आम नागरिकों को भी बड़ा फायदा होगा।

सस्ता और महंगा क्या होगा?

इस डील के बाद, कुछ चीजें सस्ती हो सकती हैं, जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, मरीन प्रोडक्ट्स, स्टील, व्हिस्की और ज्वैलरी। वहीं, कुछ उत्पाद जैसे कि कृषि उत्पाद, कार, बाइक और स्टील महंगे हो सकते हैं। हालांकि, इसका असर आम आदमी पर कम पड़ेगा, क्योंकि यह मुख्य रूप से बड़े उत्पादों पर प्रभाव डालेगा।

आम आदमी के लिए फायदे

यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट सिर्फ दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को ही नहीं, बल्कि आम आदमी की जिंदगी को भी आसान बनाएगा। दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन के सामान सस्ते हो जाएंगे। भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन में एक बड़ा बाजार मिलेगा, जहां टैरिफ या तो कम होगा या फिर खत्म हो जाएगा। इसके अलावा, इस डील से रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे, जिससे लोगों को काम के बेहतर अवसर मिलेंगे।

कृषि उत्पादों के लिए नए अवसर: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील के बारे में बात करते हुए कहा कि भारत के कृषि उत्पादों और खाद्य उद्योग (Food Industry) के लिए ब्रिटेन में नए अवसर पैदा होंगे। भारतीय वस्त्र, जूते, रत्न और आभूषण, समुद्री भोजन और इंजीनियरिंग उत्पादों को ब्रिटेन में बेहतर बाजार मिलेगा। उन्होंने इसे भारत और ब्रिटेन के बीच वर्षों की कड़ी मेहनत का परिणाम बताया और कहा कि यह डील दोनों देशों के लिए एक शक्तिशाली संदेश है।

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DRDO Developed Agni-5: भारत की अग्नि-5 मिसाइल का नया बंकर बस्टर संस्करण: सुरक्षा में ...

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DRDO Developed Agni-5: भारत की रक्षा ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) अग्नि-5 मिसाइल के एक उन्नत संस्करण पर काम कर रहा है। यह संस्करण खासतौर पर बंकरों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है, और इसे ‘बंकर बस्टर’ मिसाइल कहा जा रहा है। इस मिसाइल का मुख्य उद्देश्य दुश्मन के गहरे बंकरों, मिसाइल साइलो और कमांड सेंटर को नष्ट करना है, जो खासकर पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के पास मौजूद हैं। यह मिसाइल अमेरिका के GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) से प्रेरित है, जो बड़ी गहरी संरचनाओं को भेदने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, भारत इस काम के लिए मिसाइल-आधारित डिलीवरी सिस्टम पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जबकि अमेरिका B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स पर निर्भर है।

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अग्नि-5 का नया संस्करण: क्या खास है? (DRDO Developed Agni-5)

अग्नि-5 मिसाइल का मूल संस्करण पहले ही 5,000 किमी से अधिक की रेंज में परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखता है। लेकिन इस नए संस्करण में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सबसे खास बात यह है कि अब यह मिसाइल 2,500 किमी तक पारंपरिक बंकर बस्टर वॉरहेड को लेकर हमला कर सकेगी। इसके अलावा, अग्नि-5 हाइपरसोनिक गति (मैक 8-20) से लैस होगी, जिससे यह बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी चकमा देने में सक्षम होगी।

DRDO ने इस मिसाइल के दो संस्करण विकसित किए हैं। पहला संस्करण सतह पर बड़े क्षेत्रों को नष्ट करने के लिए एयरबर्स्ट वॉरहेड के साथ होगा, जबकि दूसरा संस्करण गहरे बंकरों, मिसाइल साइलो और कमांड सेंटर जैसे ठिकानों को निशाना बनाने के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। यह मिसाइल भारत की सामरिक रणनीति को और भी मजबूत करेगी, खासकर पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के खिलाफ जिनके पास अंडरग्राउंड ठिकाने हैं।

भारत का जवाब: क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अग्नि-5 का महत्व

भारत की यह मिसाइल विकास परियोजना क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का जवाब देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान के किराना हिल्स और चीन के होतान जैसे क्षेत्रों में गहरे बंकर और न्यूक्लियर साइट्स बनी हुई हैं, जिन्हें नष्ट करने की क्षमता भारत को अपने रक्षा क्षेत्र में नई शक्ति देगी। अगर हम पिछले उदाहरणों की बात करें, जैसे ऑपरेशन सिंदूर, जिसमें ब्रह्मोस और SCALP मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ था, तो हम देख सकते हैं कि भारत पहले ही सटीक हमलों में माहिर है। अब अग्नि-5 का बंकर बस्टर संस्करण इसे और भी ज्यादा घातक बनाएगा।

GBU-57 का कम लागत वाला विकल्प

जहां अमेरिका का GBU-57 मिसाइल 13,600 किलो वजन का होता है और 60 मीटर तक गहरे बंकरों को भेद सकता है, वहीं भारत का यह नया मिसाइल संस्करण लागत-प्रभावी होगा। भारत ने अपनी स्वदेशी तकनीक और हाइपरसोनिक गति का इस्तेमाल करते हुए एक सस्ता और प्रभावी विकल्प तैयार किया है। हालांकि, 7,500 किलोग्राम के विशाल वॉरहेड के कारण रेंज में कमी और सटीकता को सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे सटीकता (CEP<5 मीटर) की प्राप्ति में कठिनाई हो सकती है। फिर भी, यह मिसाइल भारत को अमेरिका और चीन जैसे देशों के समकक्ष लाने में मदद करेगी और आत्मनिर्भर भारत की रक्षा क्षमताओं को भी उजागर करेगी।

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Who is Jeffrey Epstein: एक साधारण से अय्याश अरबपति बनने की कहानी, जिनके काले राज अब त...

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Who is Jeffrey Epstein: 1950 के दशक के मध्य में न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में एक साधारण यहूदी परिवार में जन्मे एक बच्चे की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। बचपन में सीमित संसाधनों में पला बढ़ा वह बच्चा एक दिन अमेरिका के एलीट वर्ग का हिस्सा बना और उसकी जिंदगी ने ऐसी राह पकड़ी जो रहस्यमयी और विवादों से भरी हुई थी। उसका नाम था जेफ्री एपस्टीन, जो एक समय पर दुनिया के सबसे बड़े अय्याश अरबपतियों में से एक था

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जेफ्री एपस्टीन का जीवन जितना साधारण था, उतनी ही रहस्यमयी और विवादित रही उसकी जवानी और मौत। एक छोटे से शहर में जन्मा, एपस्टीन में बचपन से ही एक आकर्षक दिमाग और महत्त्वाकांक्षा थी। उसकी सोच और आत्मविश्वास ने उसे बचपन में ही समाज के ऊपरी तबके के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया। वह एक अच्छा मैथ्स स्टूडेंट था और स्कूल में उसने बिना डिग्री के ही पढ़ाना शुरू कर दिया था, जो उसकी पहली बड़ी स्कैम का हिस्सा था।

अचानक सफलता और उसके बाद की काली दुनियाWho is Jeffrey Epstein

एपस्टीन ने कभी भी अपनी ऊंचाइयों की कहानी आसानी से नहीं तय की थी। न्यूयॉर्क के एक प्रसिद्ध इन्वेस्टमेंट फर्म Bear Stearns में काम करने के बाद, उसने अपनी खुद की फाइनेंशियल फर्म शुरू की और तेजी से दौलत कमाई। इसके बाद, वह बड़े-बड़े अरबपतियों के फाइनेंशियल एडवाइजर बन गया, लेकिन असल में वह इन लोगों के पैसे को अपने शेडी डील्स के जरिए हड़पने का काम कर रहा था। बस यही से उसकी काली दुनिया की शुरुआत हुई। रहीसी और अय्याशी में डूबा जेफ्री अब नाबालिग लड़कियों का शोषण और तस्करी करने लग गया था।

गिलेन मैक्सवेल और एपस्टीन का कनेक्शन

इस बीच एपस्टीन की जिंदगी में गिलेन मैक्सवेल की एंट्री होती है, जो एक ब्रिटिश मीडिया टायकून की बेटी थी। दोनों की मुलाकात एक लग्जरी पार्टी में हुई और फिर उन्होंने मिलकर नाबालिग लड़कियों को टारगेट करना शुरू किया। मैक्सवेल का काम था इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर एपस्टीन के आलीशान रिजॉर्ट्स और मेंशन में ले जाना और वहां उनका शोषण करना। 2019 में एक पीड़िता ने कोर्ट के सामने गवाही देते हुए बताया था कि वो (मैक्सवेल) औरत हमें ऐसे भरोसे में लेती थी, जैसे बड़ी बहन हो, लेकिन असल में वह हम लड़कियों को एक खतरनाक जाल में फंसा रही थी।

कैसे जेफ्री एपस्टीन की असली दुनिया खुली

आपको बता दें, 2018 में मियामी हेराल्ड की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर जूली के. ब्राउन ने एपस्टीन के काले कारनामों को उजागर किया। उसकी रिपोर्ट ने फिर से एपस्टीन के खिलाफ जांच को गति दी और 2019 में उसे गिरफ्तार किया गया। उसके बाद, एफबीआई ने इसकी जांच को गंभीरता से लिया और उसके अपराधों का पर्दाफाश किया। जूली के. ब्राउन की रिपोर्ट ने दुनिया को बताया कि कैसे रसूख और पैसे ने अमेरिकी न्याय व्यवस्था को प्रभावित किया और एपस्टीन को कई सालों तक बचने का मौका मिला।

एपस्टीन के कनेक्शन और उसका ब्लैक बुक

एपस्टीन के जीवन में हर जगह एक नेटवर्क था। उसकी ब्लैक बुक में बिल क्लिंटन से लेकर डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू तक के नाम थे। ये सब लोग एपस्टीन के अपराधों को छिपाने में साथी बने थे। एपस्टीन का कुख्यात “पेडोफाइल आइलैंड” और उसकी रंगीन पार्टियां, जहां ताकतवर लोगों के साथ नाबालिग लड़कियों का शोषण किया जाता था, वह उसकी काली दुनिया का सबसे डरावना हिस्सा था।

एपस्टीन की रहस्यमयी मौत

इसी बीच समय आया 10 अगस्त 2019 का, जब जेफ्री एपस्टीन को मेट्रोपॉलिटन करेक्शनल सेंटर में अपने सेल में मृत पाया गया। पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया, लेकिन कई सवाल थे जो अब भी अनसुलझे हैं। सबसे हैरान कर देने वाली बात तो ये है कि जिस दिन जेफ्री की मौत हुई उस दिन जेल के कैमरे खराब थे, गार्ड्स सो रहे थे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी गर्दन की हड्डियों की स्थिति ने यह संदेह पैदा किया कि शायद उसे आत्महत्या नहीं बल्कि मारा गया था।

मैक्सवेल ने जेल से एक इंटरव्यू के दौरान कहा, “मुझे नहीं लगता कि जेफ्री ने खुदकुशी की, उसे किसी ने मार डाला ताकि वह राज न खोल सके।” एपस्टीन की मौत और उसके अपराधों को लेकर अब भी कई सवाल उठ रहे हैं, जो दुनिया भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

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दिल्ली-मुंबई नहीं, Extramarital Affair के मामले में नंबर वन बन गया है तमिलनाडु का यह ...

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शादीशुदा लोगों को एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स (Extramarital Affair in India) के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली वेबसाइट एशले मैडिसन (Ashley Madison) ने हाल ही में एक चौंकाने वाला दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु का कांचीपुरम शहर इस साल एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स के मामलों में सबसे टॉप पर पहुंच गया है। इसने दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े महानगरीय शहरों को पीछे छोड़ते हुए टॉप पोजीशन हासिल की है। एशले मैडिसन ने यह जानकारी जून 2025 के लिए जारी किए गए नए यूजर्स डेटा के आधार पर दी है।

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कांचीपुरम की छलांग और डेटा में बदलाव- Extramarital Affair in India

रिपोर्ट के अनुसार, कांचीपुरम पहले 2024 में 17वें स्थान पर था, लेकिन अब उसने छलांग लगाते हुए पहले नंबर पर अपनी जगह बना ली है। हालांकि, एशले मैडिसन ने इस बदलाव का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है, लेकिन यह एक अहम संकेत है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में डेटिंग ऐप्स और प्लेटफॉर्म्स की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। इन शहरों में लोग तेजी से एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स के लिए वेबसाइट पर साइनअप कर रहे हैं और अधिक सक्रिय हो रहे हैं, जबकि कुछ बड़े महानगर इस बदलाव से पीछे रह गए हैं।

दिल्ली-एनसीआर का दबदबा

इस वेबसाइट द्वारा जारी किए गए डेटा के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के इलाके इस मामले में सबसे मजबूत हैं। इस क्षेत्र के कुल 9 जिले टॉप 20 में शामिल हुए हैं, जिसमें सेंट्रल दिल्ली दूसरे स्थान पर है। दिल्ली के अलावा, गुड़गांव, गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहर भी टॉप 20 में अपनी जगह बना पाए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस लिस्ट में मुंबई का कोई भी इलाका टॉप 20 में जगह नहीं बना सका। दिल्ली और एनसीआर के आसपास के शहरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जबकि मुंबई, जो भारत का फाइनेंशियल और सांस्कृतिक हब माना जाता है, इस लिस्ट से बाहर है।

टियर-2 और टियर-3 शहरों की बढ़ती सक्रियता

वहीं, गाजियाबाद और जयपुर जैसे टियर-2 शहरों ने डेटिंग प्लेटफॉर्म्स पर साइनअप करने और अन्य गतिविधियों में अहम भूमिका निभाई है। इन शहरों ने कई बड़े शहरी केंद्रों को पीछे छोड़ दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि छोटे शहरों में भी बेवफाई और अकेलेपन के मामलों में वृद्धि हो रही है। एशले मैडिसन ने बताया कि यह रैंकिंग नए यूजर्स के साइनअप, उनकी गतिविधियों, फ्रीक्वेंसी और जुड़ाव के आंकड़ों पर आधारित है, जो यह दर्शाता है कि इन क्षेत्रों के लोग सामूहिक रूप से बेवफाई या अकेलेपन के शिकार हो रहे हैं।

क्या कहता है एशले मैडिसन का डेटा?

आपको बता दें, एशले मैडिसन एक ऐसा ग्लोबल डेटिंग प्लेटफॉर्म है जो शादीशुदा लोगों को एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स करने के लिए एक प्लेटफार्म प्रदान करता है। इस प्लेटफॉर्म पर लोग एक-दूसरे को डेट करने के लिए आते हैं, जो आमतौर पर किसी न किसी कारणवश अपने साथी से संतुष्ट नहीं होते हैं। वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ बड़े शहरों से ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों के लोग भी इसका हिस्सा बन रहे  हैं।

समाज में बदलती सोच और इसके परिणाम

इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण हो सकता है कि शादीशुदा लोग अब पहले से ज्यादा ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं, और बेवफाई की समस्याएं भी बढ़ रही हैं। यह आंकड़े समाज के बदलते सामाजिक परिवेश को भी दर्शाते हैं, जहां लोगों की मानसिकता में बदलाव आ रहा है और वे अपनी व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए ढूंढ़ रहे हैं।

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Artist Krishna passed away: पीएम मोदी और अक्षय कुमार को हंसी से लोटपोट करने वाले आर्ट...

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Artist Krishna passed away: इंटरनेट पर अपनी कला और मीम्स के लिए मशहूर क्रिएटर कृष्णा (@Atheist_Krishna) अब हमारे बीच नहीं रहे। उनकी अचानक हुई मौत ने उनके प्रशंसकों को गहरा सदमा दिया है। कृष्णा की छवि एक युवा और प्रतिभाशाली कलाकार के रूप में बन चुकी थी, जिन्होंने अपनी फोटोशॉप की कला और शानदार हास्य के जरिए लाखों लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई। उनका निधन किसी के लिए भी आसानी से यकीन करने जैसा नहीं था, क्योंकि इतनी कम उम्र में उनका यूं चला जाना हर किसी को हैरान कर देने वाला है।

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कृष्णा की मौत से जुड़ी जानकारी- Artist Krishna passed away

कृष्णा के निधन के बाद एक सोशल मीडिया यूजर ने बताया कि 10 जुलाई को कृष्णा ने उन्हें मैसेज किया था। मैसेज में कृष्णा ने बताया था कि उन्हें निमोनिया हो गया है, और उनके फेफड़ों में पानी भर गया है, जिसके कारण ऑपरेशन करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर वह इस मुश्किल से बच गए तो यह उनके लिए एक चमत्कार होगा। हालांकि, यह खबर उनके चाहने वालों के लिए बेहद दुखद और चौंकाने वाली साबित हुई।

 

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प्रधानमंत्री मोदी भी थे कृष्णा के फैन

आपको बता दें, कृष्णा अपनी कला के लिए काफी लोकप्रिय थे, खासकर पुरानी और खराब तस्वीरों में जान डालने के लिए। उनकी क्रिएटिविटी और इमोशनल फोटो रिस्टोरेशन के आर्ट ने उन्हें एक अलग पहचान दी थी। कृष्णा की कला का अंदाज इतना शानदार था कि वह न केवल आम जनता, बल्कि दिग्गजों को भी हंसी के पल देने में सफल होते थे। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके बनाए एक मीम पर हंसे थे। साथ ही, मोदी जी ने उनकी कला की सराहना की थी, और यही वजह है कि कृष्णा ने अपने काम से बहुत बड़ी पहचान बनाई।

अक्षय कुमार का संदेश और कृष्णा की खुशी

कृष्णा के फेवर में कई मशहूर हस्तियां भी सामने आईं। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने एक वीडियो बनाकर कृष्णा की तारीफ की थी। अक्षय ने कहा था, “हाइ कृष्णा, मैं अक्षय कुमार बोल रहा हूं। मैंने तुम्हारा एक मीम पीएम मोदी को दिखाया, और वे भी उसे देखकर हंसे। तुम फोटोशॉप से लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने का बेहतरीन काम करते हो।” अक्षय के इस वीडियो से कृष्णा बेहद खुश हुए थे और उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे पिन करते हुए धन्यवाद कहा था। यह वीडियो कृष्णा के लिए एक यादगार पल साबित हुआ था, और इसे उन्होंने सोशल मीडिया पर बड़े गर्व से साझा किया था।

सोशल मीडिया पर उमड़ी संवेदना

कृष्णा के निधन के बाद सोशल मीडिया पर शोक की लहर दौड़ गई। उनके फॉलोवर्स और प्रशंसकों ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। लोग कृष्णा की हंसी और उनके काम को याद कर रहे हैं। उनकी कला ने न केवल लोगों को हंसाया, बल्कि बहुत से लोगों के दिलों में इमोशनल हीलिंग भी दी। एक यूजर ने लिखा, “कृष्णा के बिना यह दुनिया अधूरी लगती है। वह केवल एक क्रिएटर नहीं, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत थे। उनका काम हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगा।”

कृष्णा ने अपनी कला से न केवल हंसी बांटी, बल्कि लोगों के जीवन में खुशियां भी लाईं। उन्होंने दिखाया कि कला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि लोगों के दर्द को कम करने और उनकी मुस्कान लौटाने का भी एक तरीका हो सकता है।

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BJP की अगली चाल: क्या पार्टी अपने उपराष्ट्रपति को चुनेगी? Ram Nath Thakur समेत नामों ...

India Next Vice President: जगदीप धनखड़ (Vice President Jagdeep Dhankhar) ने हाल ही में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया, और अब देश में सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि उनके बाद उपराष्ट्रपति कौन बनेगा? वहीं, राष्ट्रपति द्वारा उनके इस्तीफे को मंजूरी दिए जाने के बाद बीजेपी ने इस महत्वपूर्ण पद के लिए संभावित नामों पर मंथन शुरू कर दिया है। हालांकि, पार्टी इस बार किसी सहयोगी दल के नेता को नहीं, बल्कि अपनी विचारधारा से जुड़े एक मजबूत और साफ-सुथरे इमेज वाले नेता को चुनने की योजना बना रही है।

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बीजेपी के पास लोकसभा और राज्यसभा में पर्याप्त संख्याबल है, जिससे यह साफ है कि उन्हें उपराष्ट्रपति पद पर किसी विपक्षी दल से मुकाबला नहीं करना पड़ेगा। इसके बावजूद पार्टी इस बार किसी भी निर्णय पर जल्दबाजी नहीं करना चाहती और सोच-समझ कर दांव खेलने के मूड में है।

रामनाथ ठाकुर के नाम की चर्चा- India Next Vice President

हाल ही में केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर (Rajya Sabha MP Ram Nath Thakur) के नाम पर चर्चा तेज हुई थी। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बुधवार को रामनाथ ठाकुर से मुलाकात की, जिसके बाद यह कयास लगाए गए कि उनका नाम उपराष्ट्रपति के लिए हो सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें,  रामनाथ ठाकुर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के बेटे हैं और अतिपिछड़ी जाति से आते हैं, लेकिन इस मुलाकात को लेकर सूत्रों का कहना है कि यह मुलाकात केवल औपचारिक थी और उपराष्ट्रपति पद से इसका कोई संबंध नहीं था। पार्टी ने इस मुद्दे पर जेडीयू से कोई बातचीत नहीं की है और रामनाथ ठाकुर के नाम पर अटकलें बेबुनियाद हैं।

बीजेपी का विचार: उपराष्ट्रपति पद पर पार्टी के व्यक्ति को ही बैठाना

धनखड़ के इस्तीफे के बाद बीजेपी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए विचार-विमर्श करना शुरू कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस बार किसी बाहरी नेता को नहीं, बल्कि अपनी विचारधारा से जुड़े एक मजबूत और साफ छवि वाले नेता को उपराष्ट्रपति पद पर नियुक्त करने की योजना बना रही है। बीजेपी के पास ऐसे कई नेताओं की फौज है जो पार्टी कैडर से निकले हुए हैं और जिनकी छवि साफ-सुथरी है।

वेंकैया नायडू जैसा चेहरा ढूंढ रही है बीजेपी

बीजेपी के नेता इस समय वेंकैया नायडू जैसे एक मजबूत और साफ-सुथरे चेहरे की तलाश कर रहे हैं, जिन्हें पार्टी की विचारधारा से जुड़ा माना जा सके। वेंकैया नायडू 2017 में उपराष्ट्रपति पद पर चुने गए थे और वे बीजेपी के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट में मंत्री भी रह चुके हैं। बीजेपी इस बार भी उसी तरह के एक चेहरे को चुनने का विचार कर रही है, जो पार्टी के विचारों को सही तरीके से प्रस्तुत कर सके।

हरिवंश की भूमिका और उपराष्ट्रपति के चयन की प्रक्रिया

धनखड़ के इस्तीफे के बाद, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह इस समय उपराष्ट्रपति की भूमिका निभा रहे हैं। संविधान में उपराष्ट्रपति के पद के लिए कार्यभार सौंपे जाने की कोई विशेष व्यवस्था नहीं है, इसलिए इस मामले में कोई औपचारिकता की आवश्यकता नहीं है। हरिवंश नारायण सिंह इस समय राज्यसभा के उपसभापति के रूप में काम कर रहे हैं, और उनका कार्यकाल भी अगले कुछ सालों तक है।

दूसरी तरफ, बीजेपी इस समय नए उपराष्ट्रपति के चयन के बारे में गहरे विचार-विमर्श में है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस बार ऐसे व्यक्ति को चुनने जा रही है, जो पार्टी की विचारधारा से पूरी तरह जुड़ा हो और जिनकी छवि साफ-सुथरी हो। पार्टी नेताओं का मानना है कि इस बार उपराष्ट्रपति का पद किसी वरिष्ठ नेता को दिया जा सकता है, जो पार्टी के कैडर से आया हो और संगठन की मजबूती को देखते हुए उसे यह जिम्मेदारी सौंपी जा सके।

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बारिश में कार के शीशे पर कच्चा आलू घिसने का अनोखा नुस्खा, जानें इसके पीछे की वजह

Rub raw potato on car windshield: इन दिनों बारिश का मौसम (Rainy Season) चल रहा है. वही बरसात के मौसम में, खासकर भारत जैसे देशों में, कार चलाते समय सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है विंडशील्ड (windshield) पर जमने वाला कोहरा और पानी की बूँदें, जिससे दृश्यता कम हो जाती है। ऐसे में, कई लोग एक अनोखा, लेकिन कारगर उपाय अपनाते नज़र आते हैं. जी हाँ लोग कार की विंडशील्ड पर कच्चे आलू रगड़ रहे है. तो चलिए आपको इस लेख में विंडशील्ड पर कच्चे आलू को रगड़ना कितना फायदेमंद होगा इसके बारे में विस्तार से बताते है।

क्या यह वाकई काम करता है?

जैसा कि आप सभी जानते हैं, आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि बारिश के मौसम में गाड़ी चलाना कितना मुश्किल होता है। लेकिन इस बारिश के मौसम में लोग अपनी गाड़ियों के विंडशील्ड पर कुछ नया और अजीबोगरीब कर रहे हैं, जिसने सबको हैरान कर दिया है। ये कोई और नहीं, बल्कि लोग अपनी गाड़ियों के विंडशील्ड पर आलू रगड़ रहे हैं। यह आपको अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण है। दरअसल आलू में नेचुरल स्टार्च होता है, जिसे विंडशील्ड पर रगड़ने पर एक पतली, अदृश्य परत (Layer) बन जाती है।

यह परत पानी की बूंदों को फैलाने में मदद करती है, जिससे वे छोटी बूंदों के बजाय एक समान परत में फैल जाती हैं। यह पानी को विंडशील्ड (windshield) पर जमने से रोकता है और आसानी से बह जाता है, जिससे विंडशील्ड (windshield) अपेक्षाकृत साफ़ दिखता है और आपकी दृश्यता में सुधार होता है।

कई ड्राइवरों को यह तरीका काफी कारगर लगता है, खासकर हल्की से मध्यम बारिश में। यह एक तेज़ और सस्ता उपाय है जो उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनके पास एंटी-फॉग स्प्रे या विशेष वाइपर फ्लूइड उपलब्ध नहीं है। हालाँकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यह एक अस्थायी उपाय है और भारी बारिश या लंबी ड्राइविंग के लिए, किसी पेशेवर एंटी-फॉग (Professional anti-fog) उत्पाद या बेहतर वाइपर ब्लेड (wiper blades) का इस्तेमाल ज़्यादा कारगर हो सकता है।

जानें इस नुस्खे का इस्तेमाल कैसे करें?

आपको बता दें, इसका इस्तेमाल बहुत आसान है। सबसे पहले, एक कच्चा आलू लें और उसे आधा काट लें। कटे हुए हिस्से को कार के अंदरूनी और बाहरी शीशों पर अच्छी तरह रगड़ें। इसे कुछ मिनट सूखने दें। आप चाहें तो इसे किसी साफ कपड़े से हल्के हाथों से पोंछ भी सकते हैं। अगली बार जब बारिश में आपकी खिड़कियों पर कोहरा जम जाए, तो इस घरेलू नुस्खे को आज़माएँ। यह आपकी ड्राइविंग को और भी सुरक्षित और आरामदायक बना सकता है!

Untouchability in India: क्या सचमुच खत्म हो गया छुआछूत? संविधान का अनुच्छेद 17 और आज ...

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Untouchability in India: 75 साल पहले, जब भारत का संविधान (Constitution of India) लागू हुआ, तब अनुच्छेद 17 ने साफ-साफ कहा था कि छुआछूत अब गैरकानूनी है। कोई भी इसे लागू करे, उसे सजा मिलेगी। बाबासाहेब आंबेडकर (Babasaheb Ambedkar) जैसे महान नेताओं की मेहनत से ये नियम बना, ताकि दलित और समाज के कमजोर वर्गों को बराबरी का हक मिले। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये नियम सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया? आज, 2025 में, क्या हम कह सकते हैं कि छुआछूत सचमुच खत्म हो गया? चलिए, इस पर खुलकर चर्चा करते हैं।

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अनुच्छेद 17 का वादा- Untouchability in India

26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ, और अनुच्छेद 17 (Article 17 of the Constitution) ने छुआछूत को जड़ से उखाड़ने का वादा किया। ये नियम बाबासाहेब की सोच का नतीजा था, जो चाहते थे कि हर इंसान को सम्मान और बराबरी मिले। इस अनुच्छेद में साफ लिखा है कि छुआछूत का कोई भी रूप, चाहे वो मंदिर में घुसने से रोकना हो, पानी न देना हो, या अलग बर्तन में खाना देना हो गैरकानूनी है। ऐसा करने वालों को सजा हो सकती है। लेकिन क्या ये वादा जमीन पर उतर पाया?

आज भी जिंदा है भेदभाव

अगर वर्तमान की बात करें तो 2025 में भी छुआछूत की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में गुजरात के बनासकांठा ज़िले के एक गाँव में दलित दूल्हे मुकेश पारेचा की बारात को 145 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा दी गई, क्योंकि कुछ लोगों को इस बात से दिक्कत होने लगी कि एक दलित घोड़ी कैसे चढ़ सकता है। आपको बता दें, दलित दूल्हों के घोड़ी चढ़ने को लेकर कई विवाद सामने आ चुके हैं और कई मामलों में दूल्हे की हत्या तक कर दी जाती है। इसी डर से मुकेश पारेचा ने पुलिस सुरक्षा ली थी। दरअसल, दूल्हे का कहना है कि आज तक उनके गाँव में किसी दलित दूल्हे ने घोड़ी नहीं चढ़ी थी। इसलिए दूल्हे की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए गुजरात पुलिस ने बारात पर नज़र रखने के लिए ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया।

इसके बावजूद किसी ने दूल्हे की गाड़ी पर पत्थर फेंका। यह घटना तो बस एक छोटा सा उदाहरण है कि आज भी दलितों को कैसे परेशान किया जाता है।

दलितों के खिलाफ हालिया मामले

वहीं, गुजरात के अलावा, हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश, और कर्नाटक जैसे राज्यों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जो बताती हैं कि जातिगत भेदभाव अब भी समाज की गहरी जड़ों में बस्ता है। अभी हाल ही में, जुलाई 2025 में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में दलित युवक नरेश पासी को कुछ लोगों ने पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसने लोगों का गुस्सा भड़का दिया। कांग्रेस ने इसे “मनुवादी सोच” का नतीजा बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया, लेकिन हैरान कर देने वाले बात तो ये है कि इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों का कहना हैं कि ऐसी घटनाएं यहां आम हैं।

अब दलित उत्पीड़न का एक और मामला सुनिए, 9 जुलाई 2025 को बाराबंकी के लोधेश्वर महादेव मंदिर में एक दलित युवक, शैलेंद्र गौतम, को पूजा करने से रोका गया और बेरहमी से पीटा भी गया। शैलेंद्र का कहना है कि मंदिर के पुजारी और उनके बेटों ने उसे लोटे और घंटे से मारा और जातिसूचक गालियां दीं।

इस तरह अगर आप इन मामलों को सुनने बैठेंगे तो पूरा दिन बीत जाएगा, लेकिन ये घटनाएँ खत्म नहीं होंगी। आप हमारी इस बात से साफ़ अंदाजा लगा सकते हैं कि कड़े नियम-कानूनों के बावजूद दलित आज भी लाचार हैं।

दलितों के साथ भेदभाव

आपको जानकार हैरानी होगी कि की कुछ गाँवों में आज भी दलितों के बच्चों को स्कूल में अलग बिठाया जाता है, तो कहीं उन्हें अलग बर्तनों में खाना दिया जाता है। शहरों में यह भेदभाव थोड़ा छिपा ज़रूर है, लेकिन खत्म नहीं हुआ है। उदाहरण के लिए, दलितों को अक्सर शहरों में घर किराए पर लेने में दिक्कत होती है। वहीं, अगर सरकारी आंकड़ों पर गौर करें, तो राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2023 की रिपोर्ट बताती है कि अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराध कम नहीं हुए हैं, 2022 में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराधों में 13.1% की वृद्धि देखी गई, जो 50,900 से बढ़कर 57,582 हो गए। इसी तरह, अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराध भी 14.3% बढ़ गया। 2021 में ये आंकड़े 8,802 से बढ़कर 2022 में 10,064 हो गए।

कानून और उसकी हकीकत

वैसे तो, सरकार ने छुआछूत रोकने के लिए कई कानून बनाए हैं। 1955 का सिविल राइट्स प्रोटेक्शन एक्ट और 1989 का SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम इसके बड़े उदाहरण हैं। 1993 में मैनुअल स्कैवेंजिंग को भी गैरकानूनी बनाया गया, ताकि दलितों को अमानवीय कामों से बचाया जाए। लेकिन हकीकत ये है कि इन कानूनों का सही अमल नहीं हो पा रहा। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, 2022 में छुआछूत से जुड़े 1000 से ज्यादा मामले कोर्ट में लंबित थे, और ज्यादातर में आरोपी बरी हो गए। इस मामले में, पुलिस और ज्यूडिशियरी में SC/ST समुदाय का कम प्रतिनिधित्व भी एक बड़ी रुकावट है। इसके अलावा, सामाजिक न्याय मंत्रालय ने 2025 में एक बैठक की, जिसमें दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार रोकने की बात हुई, लेकिन जमीन पर बदलाव की रफ्तार धीमी है।

क्या कहते हैं लोग?

कुछ लोग मानते हैं कि छुआछूत अब सिर्फ गांवों तक सीमित है, लेकिन ये सच नहीं। शहरों में भी ये भेदभाव नए-नए रूपों में दिखता है। उदाहरण के तौर पर, कॉरपोरेट ऑफिसों में भी दलित कर्मचारियों को कई बार अलग-थलग किया जाता है। वहीं, कुछ का कहना है कि नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ रही है, और शिक्षा ने हालात को पहले से बेहतर किया है। लेकिन सच्चाई ये है कि जागरूकता के बावजूद समाज में गहरी जड़ें जमाए ये भेदभाव आसानी से खत्म नहीं हो रहा।

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Kia Carens Clavis EV 2025: भारत में लॉन्च हुई धांसू इलेक्ट्रिक कार, कीमत और फीचर्स दे...

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फॉरेन ऑटोमोबाइल कंपनी Kia ने अपनी नई इलेक्ट्रिक कार, Kia Carens Clavis 2025 को भारतीय बाजार में 15 जुलाई को लॉन्च कर दिया है। इस गाड़ी की चर्चा आजकल ग्राहकों के बीच काफी हो रही है, और यह कार सभी की उम्मीदों पर खरा उतरने का वादा करती है। खास बात यह है कि इसकी बुकिंग 22 जुलाई से शुरू हो रही है, और आप इस कार को महज 25,000 रुपये डाउनपेमेंट करके भी बुक कर सकते हैं। आइये जानते हैं इस नई Kia Carens Clavis 2025 के बारे में विस्तार से।

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Kia Carens Clavis 2025 बैटरी और रेंज                                             

Kia Carens Clavis 2025 में ग्राहकों को 42 kWh से 52 kWh क्षमता वाले बैटरी पैक का ऑप्शन मिलता है, जो एक बार चार्ज करने पर 600 किमी से 800 किमी तक की रेंज देने की क्षमता रखते हैं। इतना ही नहीं, इस कार की बैटरी को DC चार्जर के जरिए सिर्फ 29 मिनट में 80 प्रतिशत तक चार्ज किया जा सकता है, जिससे लंबी यात्रा के दौरान चार्जिंग की दिक्कत कम हो जाती है।

Kia Carens Clavis EV 2025
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Kia Carens Clavis 2025 मोटर और परफॉर्मेंस

इसके अलावा, Kia Carens Clavis 2025 में आपको 99kW की शक्तिशाली PMSM मोटर मिलती है, जो 135 PS पावर और 255 NM टॉर्क जेनरेट करने में सक्षम है। इस कार की परफॉर्मेंस भी बेहद शानदार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार केवल 7 सेकंड में 0 से 100 की स्पीड पकड़ सकती है। इसकी टॉप स्पीड लगभग 167 kmph है, जो इसे हाई-स्पीड ड्राइविंग के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प बनाता है।

Kia Carens Clavis 2025 रेंज और चार्जिंग

अगर वेरिएंट्स की बात करें तो, Kia Carens Clavis 2025 को 4 वेरिएंट्स में लॉन्च किया गया है, जिनमें अलग-अलग बैटरी पैक की रेंज देखने को मिलती है। इसके बेस मॉडल में 42 kWh लिथियम आयन बैटरी दी गई है, जो एक बार फुल चार्ज करने पर 600 किलोमीटर तक चल सकती है। इसके अलावा, इसमें 11kW एसी फास्ट चार्जर भी मिलता है, जिससे बैटरी को 6-7 घंटे में फुल चार्ज किया जा सकता है। वहीं, 100kW डीसी चार्जर से यह बैटरी 29 मिनट में पूरी तरह चार्ज हो जाती है।

Kia Carens Clavis EV 2025
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इसके अलावा, Hair मॉडल में आपको 54 kWh क्षमता वाली बैटरी मिलती है, जिससे कार 780 से 800 किलोमीटर तक दौड़ सकती है। इसे 11kW एसी चार्जर से 8 घंटे में चार्ज किया जा सकता है, जबकि 100kW डीसी से चार्ज होने में सिर्फ 40 मिनट लगते हैं।

Kia Carens Clavis 2025 के सेफ्टी फीचर्स

Kia Carens Clavis 2025 में कंपनी ने बेहतरीन सेफ्टी फीचर्स को शामिल किया है। इन फीचर्स में शामिल हैं:

  • 6 एयरबैग्स
  • लेवल 2 ADAS (Advanced Driver Assistance System)
  • ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग
  • एडॉप्टिव क्रूज कंट्रोल
  • कोलिशन वार्निंग
  • एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) के साथ इलेक्ट्रॉनिक ब्रेकफोर्स डिस्ट्रीब्यूशन (EBD)
  • इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल
  • हिल स्टार्ट एसिस्ट
  • डाउनहिल ब्रेक कंट्रोल
  • व्हीकल स्टेबिलिटी कंट्रोल
  • ब्रेक एसिस्ट
  • 360 डिग्री कैमरा

इन सभी सेफ्टी फीचर्स के कारण इस कार का लुक और परफॉर्मेंस दोनों ही शानदार हो गए हैं, और ड्राइविंग के दौरान आपके सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

Kia Carens Clavis 2025 की कीमत और EMI 

आपको बता दें, 15 जुलाई 2025 को लॉन्च हुई Kia Carens Clavis 2025 की बुकिंग 22 जुलाई से शुरू हो जाएगी। इस कार को आप सिर्फ 25,000 रुपये के डाउनपेमेंट पर बुक कर सकते हैं। अगर हम इसकी कीमत की बात करें तो, इसके बेस वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 17.99 लाख रुपये है, जबकि टॉप वेरिएंट की कीमत 24.94 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है।

इसकी EMI योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी जाएगी, जिससे ग्राहक अपनी सुविधानुसार कार का भुगतान कर सकते हैं।

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Wilful Defaulters: बैंकों के कर्ज से बचने वाले ‘विलफुल डिफॉल्टर्स’: 1.62 ...

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Wilful Defaulters: भारत में बैंकों से कर्ज लेकर उसे चुकाने से बचने वाले कर्जदारों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो भारतीय बैंकिंग सिस्टम के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है। हाल ही में सरकार ने इस संबंध में एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया है। संसद के मानसून सत्र में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) से कर्ज लेकर जानबूझकर न लौटाने वाले कॉरपोरेट कर्जदारों की संख्या 1600 के पार पहुंच चुकी है। इन डिफॉल्टरों (Wilful Defaulters) पर कुल मिलाकर 1.62 लाख करोड़ रुपये का भारी कर्ज चढ़ा हुआ है, जो बैंकों के लिए बड़ा वित्तीय बोझ बन चुका है।

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क्या होते हैं ‘विलफुल डिफॉल्टर’? (Wilful Defaulters)

चलिए सबसे पहले समझते हैं कि आखिर ‘विलफुल डिफॉल्टर’ होता क्या है? इस टर्म का मतलब होता है वह व्यक्ति या कंपनी जो जानबूझकर बैंकों से लिया गया कर्ज नहीं चुकाती, जबकि उसकी भुगतान करने की क्षमता मौजूद होती है। इस स्थिति में कर्जदार के पास पैसे होते हैं, लेकिन वह जानबूझकर कर्ज चुकाने से बचता है।  इतना ही नहीं, ये लोग कर्ज न चुकाने के लिए खुद को दिवालिया तक घोषित कर देते हैं, जबकि उनका असल उद्देश्य कर्ज का भुगतान न करना होता है।

सरकार के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक पीएसयू बैंकों ने 1629 कॉर्पोरेट कर्जदारों को ‘विलफुल डिफॉल्टर’ के रूप में पहचान लिया है। इन पर कुल 1,62,961 करोड़ रुपये का कर्ज है, जो बैंकों के लिए बड़ी समस्या है। यह आंकड़ा केंद्रीय बैंकिंग प्रणाली द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट्स पर आधारित है, जिसमें बड़े कर्जदारों के नाम और उनके कर्ज की सारी डिटेल्स शामिल की गयी है।

सरकार ने उठाए सख्त कदम

वहीं, सरकार ने अब इस गंभीर समस्या को लेकर कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस मामले पर जानकरी देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि ‘विलफुल डिफॉल्टर’ पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। इन्हें भविष्य में किसी भी नए कर्ज की सुविधा नहीं दी जाएगी, और साथ ही इन पर पांच साल तक नया व्यापार शुरू करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इसके अलावा, इन कंपनियों को अब शेयर बाजार से पूंजी जुटाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और बुरी हो जाएगी।

विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई

इसके अलावा, सरकार अब ऐसे डिफॉल्टरों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही करने की दिशा में भी कदम उठा सकती है। पंकज चौधरी ने कहा कि बैंकों को इस मामले में स्वतंत्रता दी गई है कि वे इन डिफॉल्टरों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू कर सकते हैं। यह कदम बैंकिंग सेक्टर की स्थिरता और वित्तीय स्वास्थ्य को बचाने के लिए उठाया जा रहा है।

देश छोड़कर भागे कर्जदारों पर शिकंजा

केंद्र सरकार ने केवल घरेलू डिफॉल्टरों तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि जो लोग देश छोड़कर भाग गए हैं, उनके खिलाफ भी कड़े कदम उठाए गए हैं। वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत 9 ऐसे लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है, जिन पर कर्ज की भारी रकम चुकानी थी। इसके अलावा, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत उनकी 15,298 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की गई है।

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