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Odisha Rape Case: ओडिशा में बर्थडे पार्टी से लौट रही नाबालिग लड़की से 3 लोगों ने किया...

Odisha Rape Case: दिल्ली और यूपी को औरतों के लिए सबसे असुरक्षित राज्य माना जाता हैं, लेकिन अब इसी कड़ी में ओडिशा का नाम भी जुड़ता नजर आ रहा है. दरअसल, ओडिशा से एक ऐसी रूह को झकझोर देने वाली खबर आयी है जिसे सुनकर आप ये सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आखिर कब तक देश की बहन-बेटियां दरिंदो की हवस का शिकार बनती रहेंगी. खबर के मुताबिक, ओडिशा के मलकानगिरी जिले में एक नाबालिग लड़की के साथ न सिर्फ रेप किया गया, बल्कि 4 लोगों ने मिलकर उसके साथ बेहद बेरहमी से गैंगरेप किया. हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि इन घिनोने वारदातों को अंजाम दो अलग-अलग जगहों पर दिया गया. चलिए आपको इस पुरे मामले के बारे में विस्तार से बताते हैं.

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मल्कानगिरी के पुलिस अधीक्षक का बयान आया सामने- Odisha Rape Case

मंगलवार को मल्कानगिरी के पुलिस अधीक्षक विनोद पाटिल एच ने इस पूरे मामले पर जानकरी देते हुए कहा कि शुरुआती जांच में यह मामला रेप से जुड़ा लग रहा था, लेकिन जब मामले की अच्छे से जांच की गई तब पता चला कि मामला तो गैंगरेप से जुड़ा है. घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फ़ौरन आरोपियों की तलाश शुरू कर दी और मात्र ६ घंटे के अंदर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. अपने बयान में  मलकानगिरी के एसपी ने कहा,”मलकानगिरी टाऊन थाने में 363/25 और 364/25 के नंबर से दुष्कर्म के शिकायत दर्ज हुए थे. मामले में शामिल सभी आरोपियों को 6 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया गया है. प्रोफेशनल तरीके से जांच होगी.”

एसपी ने आगे कहा, “हमारी कोशिश यह रहेगी कि जल्द ही चार्जशीट फाइल हो जाए. सभी आरोपियों को जल्द ही कोर्ट फॉरवर्ड भी कर दिया जाएगा. केस नंबर 363 के अनुसार मलकानगिरी शहर से लगभग 10/15 किलोमीटर दूर एक सुनसान जगह पर एक ट्रक ड्राइवर ने एक नाबालिग लड़की का दुष्कर्म किया था. केस नंबर 364 के अनुसार ट्रक ड्राइवर से पहले 3 और लोगों ने पीड़िता के  साथ मलकानगिरी टाऊन इलाके में गैंगरेप किया था. कुल 4 लोग जो इन मामलों में शामिल थे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है.”

जन्मदिन पार्टी से लौटते वक़्त हुआ था अपहरण

खबरों की मानें तो, यह घटना रविवार श्याम के वक़्त हुई थी. दरअसल, नाबालिग लड़की अपनी एक सेहली की जन्मदिन पार्टी में शामिल होने एक लिए घर से निकली थी और पार्टी खत्म होने के बाद घर जा रही थी, तभी रास्ते में तीन लोगों ने उसे किडनैप कर लिया. इसके बाद आरोपी पीड़िता को लेकर मल्कानगिरी शहर से लगभग 10 से 15 किलोमीटर दूर एक सुनसान जगह पर पहुंचे. यहाँ उन आरोपियों ने न सिर्फ बारी-बारी से पीड़िता संग बलात्कार किया बल्कि उसे यातनाएँ भी दी.  अपने साथ यह दरिंदगी होती देख बच्ची बिलकुल टूट चुकी थी, लेकिन फिर भी उसने थोड़ी हिम्मत दिखाई और किसी तरह से दरिंदों के चंगुल से भागने में कामयाब रही.

ट्रक ड्राइवर से मांगी मदद तो उसने भी किया रेप

उन तीन दरिंदों से बचकर भागी पीड़िता अब उस सुनसान जगह से काफी आगे निकल आई थी, लेकिन उसे क्या पता था कि अभी एक और दरिंदा उसकी ताक में बैठा है. पुलिस द्वारा दी गयी जानकारी में इस बात का खुलसा हुआ कि जब पीड़िता उस सुनसान जगह से भागकर मल्कानगिरी शहर के बाहरी इलाके के पास पहुंची तो उसकी मुलकात वहां एक ट्रक ड्राइवर से हुई. पीड़िता को लगा कि अब उसकी जान बच जाएगी, लेकिन पीड़िता की हालत देख उस ट्रक ड्राइवर ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया. इसी दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने पीड़िता को ट्रक चालक के साथ संदिग्ध हालत में देखा और  उनकी सूझबूझ  से पीड़ित लड़की की जान बच गयी.

पुलिस ने कहा पीड़िता को मिलेगा न्याय

इस जघन्य अपराध की सूचना जब पुलिस को मिली, तो वे तुरंत एक्शन में आए और गहन जाँच के बाद पुलिस ने इस वारदात में शामिल चारों हैवानों को गिरफ्तार कर लिया. इस घटना के बाद से मल्कानगिरी में जनता में भारी आक्रोश है. स्थानीय लोग पीड़िता को न्याय दिलाने की और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग उठा रहे हैं. वहीं, पुलिस ने भी जनता को आश्वासन दिया है कि पीड़िता को हर हाल में न्याय दिलाया जाएगा.

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Lucknow Crime News: 10 साल पहले मां से की थी मारपीट… लखनऊ में बेटे ने दुकानदार ...

Lucknow Crime News: उत्तर प्रदेश के लखनऊ से एक बेहद ही हैरान करने वाला मामला सामने आ रहा है। यहां एक बेटे ने अपनी मां की पिटाई का बदला खूनी तरीके से लिया। बदले की आग में जल रहे  बेटे ने एक दुकानदार की हत्या कर दी। दरअसल यह मामला एक महीने पुराना है लेकिन अब तक पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। लेकिन अब पुलिस ने इस हत्या की पूरी गुत्थी सुलझा ली है। मामला 19 जून का है जब लखनऊ पुलिस को इंदिरा नगर में दुकानदार मनोज की हत्या की सूचना मिली थी। इस हत्या के पीछे की वजह आपसी रंजिश बताई गई थी। वारदात को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी सोनू ने अपने चार दोस्तों को पार्टी का वादा करके इस वारदात में शामिल किया और इस हत्या को अंजाम दिया। आइए आपको विस्तार से इस खबर के बारे में बताते हैं।

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हत्या की योजना में चार दोस्त शामिल थे– Lucknow Crime News

डीसीपी ईस्ट शशांक सिंह के अनुसार, मुख्य संदिग्ध अनूप कुमार उर्फ सोनू कश्यप (उम्र 21) और उसके चार साथियों ने मनोज की हत्या की साजिश रची थी। सोनू ने अपने दोस्तों को पार्टी का लालच दिया, जिससे वे इस साजिश में शामिल हो गए। डीसीपी के अनुसार, मनोज इंदिरा नगर सेक्टर-14 में माही मेडिकल के सामने नारियल पानी का ठेला लगाता था। मनोज शिव बिहार कॉलोनी में किराए पर रहता था।

19 जून की शाम करीब नौ बजे वह अपनी दुकान बंद करके घर जा रहा था। अवध विहार के पास रास्ते में पांचों आरोपियों ने उस पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। मनोज के बेहोश होने पर उसे मरा हुआ समझकर सभी आरोपी मौके से भाग गए। बाद में, अस्पताल में इलाज के दौरान मनोज की मौत हो गई।

पुलिस ने पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया

मनोज के पिता रमाकांत की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था और आरोपियों की तलाश कर रही थी। रविवार को पुलिस ने पाँचों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। कल्याणपुर गुडम्बा निवासी 21 वर्षीय अनूप कुमार उर्फ सोनू कश्यप, आदिल नगर निवासी 30 वर्षीय सनी कश्यप, 21 वर्षीय सलामू, 21 वर्षीय रंजीत कुमार और विकास नगर निवासी 25 वर्षीय रहमत अली को मुख्य आरोपी बनाया गया है। सीसीटीवी और सर्विलांस की मदद से युवक की हत्या के आरोप में पाँच लोगों को हिरासत में लिया गया है।

सोनू की माँ पर हमले का बदला लेने के लिए रची गई थी साजिश

हत्या में शामिल मुख्य संदिग्ध सोनू ने पूछताछ में बताया कि मनोज ने 2015 में कल्याणपुर की मजार वाली गली में एक मकान किराए पर लिया था। उस समय मनोज और उसके पिता रमाकांत ने सोनू की माँ की पिटाई की थी। इस मामले में गुडंबा थाने में एक एनसीआर भी दर्ज की गई थी। घटना के बाद मनोज और रमाकांत वहाँ से चले गए थे।

तीन महीने से चल रही थी प्लानिंग

बदला लेने की प्लान लगभग तीन महीने पहले शुरू हुई थी। दरअसल तीन महीने पहले एक दिन सोनू ने मनोज को माही मेडिकल के पास ठेला लगाते देखा। इसके बाद से वह लगातार उसकी जगह की रेकी करता रहा। बदले की आग में जल रहे सोनू ने अपने इस प्लान में दोस्तों के साथ मिलकर बदला लेने की योजना बनाई। घटना वाले दिन, सभी आरोपी मुंशी पुलिया चौराहे पर मनोज की दुकान के पास पहले से ही मौजूद थे। जैसे ही मनोज घर जाने लगा, आरोपियों ने उसका पीछा करते हुए उस पर हमला कर दिया।

सोशल मीडिया पोस्ट से हुआ हत्याकांड का खुलासा

पुलिस के लिए यह मामला एक ब्लाइंड मर्डर था क्योंकि मनोज के पिता को किसी पर शक नहीं था। पुलिस ने 150 से ज़्यादा सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जाँच शुरू की। एक फुटेज में नारंगी रंग की डेविल टी-शर्ट पहने एक युवक भागता हुआ दिखाई दिया, जिसकी पहचान सोनू के रूप में हुई।

पुलिस ने जब सोनू का सोशल मीडिया अकाउंट खंगाला, तो उसे उस टी-शर्ट में दोस्तों के साथ पार्टी करते हुए उसकी तस्वीरें मिलीं, जिससे पुलिस को एक ठोस सुराग मिला। इसके बाद पुलिस ने बाकी आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और सभी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

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Haunted Doll Annabelle Story: डैन रिवेरा की रहस्यमयी मौत और गायब हुई एनाबेल डॉल: इसके...

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Haunted Doll Annabelle Story: क्या आप भूत-प्रेतों में विश्वास रखते हैं? अगर नहीं, तो शायद इस खबर को पढ़ने के बाद आप विश्वास करने लगेंगे। ठहरिए, हमारा मकसद आपको डराने का नहीं है। दरअसल, खबर कुछ इस तरह की है जिसे पढ़कर अब हर कोई भूत-प्रेतों और आत्माओं की कहानियों पर विश्वास करने लगा है। तो हुआ कुछ यूं कि अमेरिका के एक प्रसिद्ध पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर (America paranormal investigator Dan Rivera), आसान भाषा में कहें तो भूत-प्रेतों के जासूस डैन रिवेरा की रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई है। उनका शव गेटीसबर्ग के एक होटल के कमरे में मृत पाया गया। हमेशा रहस्यों की दुनिया में रहने वाला व्यक्ति अपनी ज़िंदगी में खुद एक रहस्य बन जाएगा, शायद ही उन्होंने ऐसा सोचा होगा। लेकिन इस केस में सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि उनकी मौत ऐसे वक्त में हुई जब वह हाल ही में भूतिया डॉल एनाबेल के साथ टूर पर निकले थे।

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डैन रिवेरा का प्रारंभिक जीवन और पैरानॉर्मल दुनिया – Haunted Doll Annabelle Story

अमेरिका के चर्चित पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर डैन रिवेरा (America paranormal investigator Dan Rivera Death), जो एड और लॉरेन वॉरेन द्वारा स्थापित Warren Occult Museum और New England Society for Psychic Research (NESPR) के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। डैन रिवेरा के प्रारंभिक जीवन के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनके परिवार के बारे में भी कोई नहीं जानता, लेकिन भूत-प्रेत रिसर्च में उनका ज्ञान और योगदान पूरी तरह से प्रमाणित है। यही वजह है कि उन्हें पैरानॉर्मल रिसर्च की दुनिया में एक प्रमुख नाम माना जाता है। ख़बरों के अनुसार, वे अक्सर वॉरेन परिवार और टोनी स्पेरा (जो वॉरेन के दामाद हैं) के साथ कई पैरानॉर्मल जाँचों में भाग लेते थे।

एनाबेल डॉल और डैन रिवेरा का कनेक्शन

मैं दावे के साथ कह सकती हूँ कि आपने “एनाबेल” का नाम तो सुना ही होगा? हाँ, वही एनाबेल जिसे भारत में पापी गुड़िया के नाम से जाना जाता है। कहा जा रहा है कि यही पापी गुड़िया डैन रिवेरा के पैरानॉर्मल कार्यों का अहम हिस्सा रही। डैन और Tony Spera मिलकर ‘Annabelle: The True Story’ जैसे इवेंट्स में हिस्सा लेते थे, जहां लोग इस डॉल के बारे में वास्तविक जानकारी और इसके जुड़े अनुभव सुन सकते थे। इसके अलावा, डैन ने 2024 में ‘Devils on the Run Tour’ नामक एक पैरानॉर्मल टूर भी आयोजित किया था, जिसमें वह कुख्यात एनाबेल डॉल (Annabelle Doll)  के साथ अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में गए। इस टूर के जरिए वह लोगों के साथ अपने उन अनुभवों को साझा कर रहे थे जो उन्होंने डॉल के साथ महसूस किए थे। लेकिन लोगों ने उनके किस्सों को अंधविश्वास करार दिया। हालाँकि, डैन ने इन बातों पर ध्यान नहीं दिया और हमेशा इस बात पर जोर दिया कि वह बस लोगों को सच्चाई से जागरूक कर रहे हैं।

डैन रिवेरा की रहस्यमयी मौत

इन सब घटनाओं के बीच वक़्त आया 13 जुलाई 2025 का। डैन अपनी ‘Devils on the Run’ टूर पर थे और गेटीसबर्ग, पेनसिल्वेनिया के एक होटल में ठहरे हुए थे। सब कुछ ठीक चल रहा था, कि तभी अचानक डैन अपने कमरे में बेहोश होकर ज़मीन पर गिर पड़ते हैं। डैन को बेसुध देख होटल की टीम फ़ौरन मेडिकल टीम को बुलाती है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डैन अपनी रहस्यमयी दुनिया में एक और रहस्य छोड़, इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। उनकी मौत को लेकर अधिकारी भी कुछ भी कहने से झिझक रहे हैं। यहाँ तक कि डैन की ऑटोप्सी रिपोर्ट भी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। जांच के दौरान कमरे में किसी तरह के संघर्ष, चोरी या घुसपैठ के कोई संकेत नहीं मिले।

एनाबेल डॉल (Annabelle doll) का गायब होना

इस घटना में सबसे डराने वाली बात यह है कि डैन की मौत के बाद से होटल के कमरे से पापी गुड़िया, यानी कुख्यात एनाबेल डॉल भी गायब है, जो इस पूरे मामले को और भी डरावना और रहस्यमयी बना देती है। एडम्स काउंटी के कोरोनर ने पुष्टि की है कि गुड़िया न तो होटल के कमरे में मिली थी और न ही पूरे परिसर में उसका कोई निशान मिला। पुलिस जाँच में भी किसी आपराधिक गतिविधि के कोई संकेत नहीं मिले, फिर भी सोशल मीडिया और हॉरर कम्युनिटी में यह सवाल उठ रहा है कि क्या डैन रिवेरा की रहस्यमयी मौत के पीछे कोई अलौकिक शक्ति थी?

एनाबेल डॉल से जुड़ी रहस्यमयी घटनाएँ

एनाबेले डॉल से जुड़ा ये कोई पहला मामला नहीं है. खबरों की मानें तो, 1970 में एनाबेले डॉल का किस्सा शुरू हुआ, जब डोना नाम की एक नर्सिंग स्टूडेंट को उसकी माँ ने यह डॉल गिफ्ट में दी थी। शुरुआत में, यह एक साधारण गुड़िया जैसी दिखती थी, लेकिन जल्द ही इसके साथ अजीबोगरीब घटनाएँ जुड़ने लगीं। डोना और उसकी रूममेट एंजी ने देखा कि गुड़िया कमरे में अपने आप ही जगह बदल लेती थी। कभी-कभी दीवारों पर खून के लाल निशान दिखाई देते थे। इन घटनाओं के बाद, डोना और एंजी ने वॉरेन दंपत्ति से संपर्क किया, जिन्होंने गुड़िया में किसी खतरनाक आत्मा का साया मानकर उसे अपने कब्जे में ले लिया और वॉरेन म्यूज़ियम में एक ग्लास केस में रख दिया।

क्या डैन रिवेरा अब खुद एक रहस्य बन चुके हैं?

पुलिस और कोरोनर फिलहाल डैन रिवेरा की मौत की गुत्थी सुलझाने में लगे हुए हैं और उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं। वहीं एनाबेले डॉल के गायब होने और डैन की मौत (America paranormal investigator Dan Rivera Death) ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है: क्या डैन रिवेरा की मौत किसी अलौकिक घटना का काम है या महज़ एक संयोग?

डैन रिवेरा के सहयोगियों और NESPR ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका इरादा डर फैलाना नहीं था, बल्कि उन्होंने हमेशा सच्चाई सामने लाने की कोशिश की।

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Titan-Damas Deal: टाइटन ने खरीदी दुबई की लग्जरी ज्वेलरी फर्म Damas की 67% हिस्सेदारी,...

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Titan-Damas Deal: टाटा समूह की घड़ी निर्माता कंपनी टाइटन ने रविवार को ऐतिहासिक घोषणा की कि वह दुबई स्थित लग्जरी ज्वैलरी ब्रांड Damas LLC में मेजोरिटी स्टेक (67%) खरीदने जा रही है। यह डील टाइटन की अंतर्राष्ट्रीय विस्तार रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है। टाइटन की सहायक कंपनी Titan Holdings International FZCO ने यह डील कतर की कंपनी Mannai Corporation QPSC से की है। यह डील 31 जनवरी 2026 तक पूरी होने की संभावना है, हालांकि अभी इसे रेगुलेटरी मंजूरी मिलनी बाकी है।

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कितनी है डील की कीमत? (Titan-Damas Deal)

खबरों के मुताबिक, यह डील टाटा समूह की कंपनी टाइटन की अब तक की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय डील साबित हो सकती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस डील की एंटरप्राइज वैल्यू 1,038 मिलियन दिरहम (AED) यानी करीब 2438 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस डील के ऐलान के बाद टाइटन के शेयरों में तेजी देखने को मिली है। कंपनी के शेयर 0.74% की बढ़त के साथ 3,428 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुए।

दमास: मिडिल ईस्ट का बड़ा ज्वैलरी ब्रांड

Damas LLC मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी ज्वैलरी रिटेल कंपनी है। इसकी शुरुआत 1907 में हुई थी, और अब यह UAE, सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन में कुल 146 स्टोर्स के साथ एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन चुकी है। 120 साल पहले इस ब्रांड की शुरुआत मिडिल ईस्ट में गोल्ड सर्विसेज देने के रूप में हुई थी।

यह ज्वैलरी ब्रांड प्रोडक्ट इनोवेशन, क्वॉलिटी और कस्टमर एक्सपीरियंस के लिए जाना जाता है। टाइटन के लिए यह डील GCC (गुल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) देशों में अपने ज्वैलरी बिजनेस को और मजबूती देने का एक बड़ा अवसर है। इस डील के माध्यम से टाइटन भारतीय प्रवासियों के अलावा अन्य देशों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना बना रहा है।

टाइटन और दमास का अधिग्रहण: कंपनी की रणनीति

टाइटन के मैनेजिंग डायरेक्टर सी.के. वेंकटारमण ने कहा, “GCC देशों और अमेरिका में तनिष्क की सफलता के बाद हमारा ग्लोबल ज्वैलरी कारोबार अब अगले स्टेप में तेजी से आगे बढ़ रहा है। Damas के अधिग्रहण से हम भारतीय प्रवासियों से आगे बढ़कर अन्य देशों तक पहुंच प्राप्त कर रहे हैं।” यह कदम टाइटन के ग्लोबल ज्वैलरी कारोबार को एक नई दिशा देने की ओर है और कंपनी के लिए नया मार्केट एक्सप्लोर करने का अवसर है।

कतर की कंपनी Mannai Corporation का बयान

इस डील पर कतर की Mannai Corporation के ग्रुप CEO अलेक्ज ग्रेवाल ने कहा, “Mannai एक पब्लिक लिस्टेड कंपनी है, जो मुख्य रूप से व्यापार और IT सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करती है। Damas 2012 से हमारी सब्सिडियरी कंपनी बनी थी। हमें खुशी है कि टाइटन और दमास के भविष्य में निवेश कर रहा है।”

भारत में टाटा ग्रुप की कंपनियों का नेटवर्क

वैसे तो टाटा समूह की भारत में कई लिस्टेड और नॉन लिस्टेड कंपनियां हैं, और समूह ने विभिन्न क्षेत्रों की कई कंपनियों में निवेश किया है। अब इसी कड़ी में टाइटन ने दुबई के मशहूर ज्वेलरी ब्रांड Damas को भी शामिल कर लिया है। माना जा रहा है कि इस डील से टाटा समूह की विदेशों में उपस्थिति और बढ़ेगी।

GCC देशों में व्यापार बढ़ाएगा टाइटन

इस अधिग्रहण का उद्देश्य टाइटन को GCC देशों में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करना है। Damas के पास 146 स्टोर्स का एक नेटवर्क है, जो टाइटन को इन देशों में अपने रिटेल नेटवर्क को विस्तार करने में मदद करेगा। इस डील से टाइटन अपने वैश्विक ज्वैलरी कारोबार को नए मुकाम पर ले जाने के लिए तैयार है।

इंटरनेशनल रणनीति का हिस्सा

टाइटन की यह डील कंपनी की इंटरनेशनल एक्सपेंशन स्ट्रैटजी का अहम हिस्सा मानी जा रही है। पहले से ही अमेरिका और सिंगापुर में स्टोर चलाने के बाद, अब कंपनी खाड़ी देशों में अपनी पैठ बनाने के लिए दमास के साथ एक मजबूत साझेदारी की योजना बना रही है। टाइटन का यह कदम नई संभावनाओं को खोलने के साथ-साथ सप्लाई चेन, रिटेल नेटवर्क और टैलेंट में सहयोग को बढ़ाने का मौका देगा।

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Shri Krishna First Name: अनिरुद्धाचार्य को तो नहीं पता लेकिन क्या आप जानते है भगवान श...

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Shri Krishna First Name: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और कथावाचक अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya) का एक वीडियो हाल ही में वायरल हुआ था, जिस पर खूब विवाद हुआ था। उस वीडियो में अखिलेश यादव अनिरुद्धाचार्य से पूछते हैं, “जब भगवान कृष्ण ने देवकी के गर्भ से जन्म लिया, तो माता ने उन्हें सबसे पहले क्या नाम से पुकारा?” इस सवाल के जवाब में अनिरुद्धाचार्य कुछ पल सोचते हैं और फिर जवाब देते हैं ‘वासुदेव’। यह जवाब सुनकर अखिलेश यादव संतुष्ट नहीं दिखते और कहते हैं, “यहीं से आपके और हमारे रास्ते अलग हो जाते हैं।” जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई कि इस सवाल का सही जवाब क्या है? अगर आप भी इस सवाल का सही जवाब जानना चाहते हैं तो खबर को अंत तक पढ़ते रहिए।

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माता देवकी ने किस नाम से पुकारा? (Shri Krishna First Name)

शास्त्रों की बात करें तो, इस प्रश्न का कोई सटीक उत्तर नहीं मिलता कि जब भगवान कृष्ण देवकी के गर्भ से प्रकट हुए, तो माता ने उन्हें किस नाम से पुकारा? आमतौर पर शिशु के जन्म के समय माता का पूरा ध्यान शिशु के कोमल शरीर को गोद में लेने और उस प्रेम-स्नेह में ही होता है, जिसमें नामकरण के प्रश्न पर ध्यान नहीं दिया जाता।

हालांकि, शास्त्री विनोदजी बताते हैं कि श्रीराम और श्रीकृष्ण के जन्म के समय के प्रसंगों में यह स्पष्ट रूप से नहीं आता कि माता ने उन्हें पहले नाम से कैसे पुकारा। शास्त्रों में यह कथा तो मिलती है कि श्रीराम और श्रीकृष्ण के जन्म के समय उन्हें भगवान के अवतार के रूप में देखा गया। तो चलिए इस प्रश्न का सही उत्तर जानते हैं।

श्रीमद्भागवत में भगवान के प्रकट होने का वर्णन

प्राचीन ग्रंथों में भगवान कृष्ण के प्रकट होने के समय का विस्तृत वर्णन मिलता है। श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के अध्याय 3 में इसका उल्लेख मिलता है, जहां बताया गया है कि भगवान कृष्ण चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए थे। इसी समय माता देवकी ने उन्हें भगवान विष्णु के रूप में देखा था। यह भी उल्लेख मिलता है कि भगवान कृष्ण मध्यरात्रि के समय प्रकट हुए थे, जब चारों ओर अंधकार था और संसार में कोई प्रकाश नहीं था।

भगवान के नामों का महत्व

वहीं दूसरी ओर, शास्त्रों में भगवान के नामों का महत्व गहराई से वर्णित है। श्रीकृष्ण का नाम ‘मधुसूदन’ भी काफी प्रसिद्ध है और यह नाम कई प्रसंगों में आया है। जैसे श्रीमद्भागवत में माता देवकी ने उन्हें ‘मधुसूदन’ नाम से पुकारा था, वहीं महाभारत के प्रसंगों में भी इस नाम का उल्लेख हुआ है।

नामकरण संस्कार और भगवान श्रीकृष्ण

वहीं अगर हम इतिहास के पान उठाकर देखें तो, भगवान श्रीकृष्ण का नामकरण संस्कार श्रीगोकुल में यदुवंशियों के कुल पुरोहित गर्गाचार्य द्वारा किया गया था। गर्गाचार्य ने नंद बाबा के गांव में भगवान श्रीकृष्ण और उनके भाई बलराम का नामकरण किया। श्रीकृष्ण को ‘कृष्ण’ नाम दिया गया क्योंकि वह सांवले थे और उनके नाम के साथ जुड़ा हुआ यह वर्णन उनके विभिन्न युगों में विभिन्न रूपों को दर्शाता है।

अब अगर अखिलेश यादव के सवाल के जवाब पर गौर करें, तो माता देवकी ने श्रीकृष्ण को विभिन्न नामों से पुकारा होगा, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि जन्म के तुरंत बाद उनका नाम क्या था। दूसरी ओर, एक तर्क यह भी है कि भगवान के अनेक नामों में से ‘मधुसूदन’ और ‘विष्णु’ उनके प्रथम नाम हो सकते हैं, जैसा कि श्रीमद्भागवत में वर्णित है।

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मॉनसून में रहें सावधान! बढ़ जाता है त्वचा संक्रमण का जोखिम, जानें बचाव के उपाय

Safety precautions during rainy season: अक्सर बरसात के मौसम (Rainy Season) में त्वचा संबंधी समस्याएं आम हो जाती हैं। नमी और उमस के कारण फंगल, बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण (Fungal, bacterial, and viral infections) का खतरा बढ़ जाता है। इन संक्रमणों (Infections) से बचने और अपनी त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। तो चलिए आपको इस लेख में विस्तार से त्वचा संक्रमण से बचने के उपाय के बारे में बताते है।

स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान

दिन में कम से कम एक बार एंटीबैक्टीरियल साबुन (Antibacterial Soap) से नहाएँ, खासकर अगर आप बाहर रहे हों या पसीना आ रहा हो। नहाने या बारिश में भीगने के बाद अपनी स्किन (Skin) को अच्छी तरह सुखाएँ, खासकर शरीर के मोड़ों (जैसे बगल, जांघों के बीच और उंगलियों के बीच) पर। नमी से फंगल संक्रमण हो सकता है। हमेशा सूखे और साफ कपड़े पहनें। सिंथेटिक कपड़ों (Synthetic clothing) की बजाय सूती कपड़े (Cotton fabric) पहनना बेहतर है क्योंकि ये नमी सोख लेते हैं और हवा का संचार बेहतर करते हैं।

सही खान-पान और हाइड्रेशन

बारिश के मौसम में त्वचा (Skin) के स्वास्थ्य के लिए शरीर को हाइड्रेटेड (Hydrated) रखना ज़रूरी है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। अपने आहार में फल, सब्ज़ियाँ और एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidants) से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। इससे आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मज़बूत होगी और संक्रमणों (Infections) से लड़ने में मदद मिलेगी।

अन्य बचाव के उपाय

बरसात के समय हो सके तो खुले जूते या सैंडल पहनें ताकि पैर सांस ले सकें और नमी जमा न हो। अगर जूते और मोज़े गीले हो जाएँ तो तुरंत बदल दें। संक्रमित जगह को बार-बार न छुएँ, भले ही उसमें खुजली हो, क्योंकि इससे संक्रमण फैल सकता है। अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहाँ बहुत ज़्यादा नमी है, तो आप त्वचा की सिलवटों पर एंटीफंगल पाउडर (Antifungal Powder) का इस्तेमाल कर सकते हैं। व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें और दूसरे लोगों के तौलिये, कपड़े या अन्य निजी सामान का इस्तेमाल न करें।

इस मौसम में अपनी त्वचा पर कठोर रासायनिक उत्पादों के इस्तेमाल से भी बचें क्योंकि ये त्वचा को और भी संवेदनशील बना सकते हैं। इन आसान उपायों को अपनाकर आप मानसून में होने वाले त्वचा संक्रमणों से खुद को बचा सकते हैं और स्वस्थ त्वचा का आनंद ले सकते हैं। क्या आप किसी विशिष्ट प्रकार के त्वचा संक्रमण के बारे में अधिक जानना चाहेंगे?

Vice Presidential Election Process: जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद के ...

Vice Presidential Election Process: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Vice President Jagdeep Dhankhar) ने सोमवार रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। आजाद भारत में यह पहली बार है जब किसी उपराष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के बीच में ही इस्तीफा (Jagdeep Dhankhar Resign News) दे दिया हो। वैसे तो उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया, लेकिन उनके इस्तीफे के समय और हालिया गतिविधियों ने इसे लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके इस्तीफे के बीच इस बात पर गरमागरम बहस चल रही है कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा, वहीं इस पद के लिए कुछ नामों पर भी चर्चा हो रही है।

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धनखड़ का इस्तीफा: स्वास्थ्य या राजनीति? (Vice Presidential Election Process)

आइए पहले जानते हैं कि धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) को भेजे अपने इस्तीफे में क्या कहा, उन्होंने लिखा कि स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देने के लिए वह तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे सिर्फ स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, लेकिन कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे कुछ और कारण भी हो सकते हैं। उनके इस्तीफे की टाइमिंग और पहले दिन उनकी सक्रियता से यह सवाल उठता है कि क्या उनका इस्तीफा सिर्फ स्वास्थ्य के कारण था या इसके पीछे किसी राजनीतिक फैसले की भी भूमिका हो सकती है।

अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा?

वहीं, धनखड़ के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अब अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होता है। फिलहाल, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह कार्यवाहक सभापति की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह अब राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाएंगे। हालांकि, यह उनकी अस्थायी भूमिका होगी और नए उपराष्ट्रपति के चुनाव तक वह इसे संभालेंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें, नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन यह साफ नहीं है कि सत्ताधारी गठबंधन एनडीए और विपक्ष किसे अपना उम्मीदवार बनाएंगे।

सत्ताधारी दल की नजरें: मनोज सिन्हा, नीतीश कुमार या महिला उम्मीदवार?

उम्मीदवारों की सूची में एनडीए नेताओं ने नामों पर चर्चा शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के नामों की चर्चा हो रही है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यूपी को ध्यान में रखते हुए बीजेपी यह पद मनोज सिन्हा को दे सकती है, जबकि बिहार चुनाव को देखते हुए यह पद नीतीश कुमार को ऑफर किया जा सकता है। लेकिन आधिकारिक तौर पर इन नामों को लेकर अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है

बीजेपी का प्रयास: मजबूत और दमदार उम्मीदवार

भाजपा के लिए उपराष्ट्रपति पद पर कोई भी नाम चुनने से पहले यह जरूरी है कि वह एक मजबूत और प्रभावशाली नेता का चयन करे, जो राज्यसभा की कार्यवाही को प्रभावी तरीके से चला सके और साथ ही पार्टी का संदेश भी दे सके। बीजेपी के पास राज्यसभा में बहुमत है, और वह इस पद पर एक ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करना चाहेगी, जो विपक्ष के साथ संतुलन बनाए रख सके और पार्टी के उद्देश्यों को आगे बढ़ा सके।

विपक्ष का क्या कहना है?

इसी बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के इस्तीफे को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह घटना जितनी अकल्पनीय है, उतनी ही चौंकाने वाली भी है। रमेश के मुताबिक, वह 5 बजे तक धनखड़ के साथ थे और शाम 7:30 बजे उनकी फोन पर बात भी हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि स्वास्थ्य कारणों को प्राथमिकता देनी चाहिए, लेकिन इस्तीफे के पीछे कुछ और कारण हो सकते हैं, जिनका खुलासा अब तक नहीं हुआ है।

उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया

उम्मीदवार के नाम पर चर्चा करते हुए, आइए अब उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया के बारे में भी जान लें। भारतीय संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष होता है, जिसमें केवल सांसदों को ही वोट देने का अधिकार होता है। चुनाव के लिए, उम्मीदवार को कम से कम 20 सांसदों के प्रस्तावकों और समर्थकों की आवश्यकता होती है। चुनाव प्रणाली के तहत, सभी सांसदों को प्राथमिकता के आधार पर अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देना होता है। यदि किसी भी उम्मीदवार को आवश्यक बहुमत नहीं मिलता है, तो चुनावी प्रक्रिया जारी रहती है और फिर सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को बाहर कर दिया जाता है, उनके वोट अगले उम्मीदवार को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।

कौन बनेगा अगला उपराष्ट्रपति?

धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है और इसे लेकर राजनीतिक दलों में हलचल मची हुई है। भाजपा और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने उम्मीदवारों पर विचार कर रहे हैं। यह चुनाव निश्चित रूप से भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा, क्योंकि इससे न केवल उपराष्ट्रपति पद का फैसला होगा, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच नए समीकरण भी सामने आएंगे।

बता दें, संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होने के 60 दिनों के भीतर नए उपराष्ट्रपति का चुनाव करना ज़रूरी है। यानी 19 सितंबर 2025 तक नए उपराष्ट्रपति का चुनाव हो जाएगा। चुनाव आयोग जल्द ही उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है।

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Jagdeep Dhankhar Resign: जगदीप धनखड़ ने सेहत का हवाला देकर सियासत को कहा अलविदा! जाने...

भारतीय राजनीति में इस समय भूचाल आ गया है और इसके पीछे की वजह हैं भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा (Jagdeep Dhankhar Resign)। दरअसल, खबर आ रही है कि उपराष्ट्रपति धनखड़ (Vice President Jagdeep Dhankhar) ने सोमवार रात को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बताई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को लेकर चर्चाओं का माहौल गर्म हो गया है। हालिया गतिविधियों को देखकर उनके इस्तीफे की टाइमिंग पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। चलिए, आपको विस्तार से बताते हैं कि क्या उनका इस्तीफा सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी था, या इसके पीछे कुछ और सियासत हो सकती है।

फिलहाल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति ने आगे की कार्रवाई के लिए उनका इस्तीफा गृह मंत्रालय को भेज दिया है। खबरों की मानें तो, धनखड़ विदाई समारोह में शामिल नहीं होंगे और न ही कोई विदाई भाषण देंगे।

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इस्तीफे से पहले की सक्रियता- Jagdeep Dhankhar Resign

आपको बता दें कि यह इस्तीफ़ा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह ठीक ऐसे समय आया है जब इस साल संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session 2025) शुरू हुआ है। गौर करने वाली बात यह है कि इस दिन वह पूरी तरह सक्रिय थे, उन्होंने विपक्षी नेताओं से मुलाकात की और राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन भी किया। इसके अलावा, उन्होंने महाभियोग प्रस्ताव पर औपचारिक घोषणा भी की। अब सवाल यह उठता है कि अगर स्वास्थ्य ही कारण होता, तो क्या वह इतनी सारी गतिविधियों में शामिल होते? क्या उनकी यह सक्रियता इस बात का संकेत नहीं है कि इस्तीफ़े के पीछे कोई और वजह हो सकती है?

 

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महाभियोग प्रस्ताव से ठीक पहले इस्तीफा

इतना ही नहीं, इस्तीफ़े से कुछ घंटे पहले ही राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी। विपक्ष ने जस्टिस वर्मा के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया, जिसे धनखड़ ने स्वीकार कर लिया और उसी दिन सदन में बता दिया। उन्होंने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और क़ानून मंत्री से इसकी पुष्टि भी ली। उनकी सक्रियता यह साबित कर रही है कि इस्तीफ़ा देने से पहले वे अपनी संवैधानिक प्रक्रियाओं को भी आगे बढ़ा रहे थे।

राजनाथ सिंह के कार्यालय में हलचल

सूत्रों की मानें तो इस्तीफ़े से कुछ देर पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) के कार्यालय में मची थी। भाजपा सांसदों से कोरे कागजों पर दस्तखत करवाए गए। कुछ सांसद आए और बिना कुछ कहे चले गए। इसके बाद ही धनखड़ के इस्तीफ़े की बात सामने आई। अगर इन कड़ियों को जोड़कर देखा जाए तो साफ है कि यह इस्तीफ़ा अचानक नहीं बल्कि पूर्व नियोजित रहा होगा।

सरकार से टकराव: क्या कारण था इस्तीफा?

वहीं, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धनखड़ का इस्तीफा सरकार से कुछ मुद्दों पर मतभेद के कारण हो सकता है। किसानों के मुद्दे, महाभियोग प्रस्ताव की स्वीकृति, या विपक्ष के साथ संतुलन साधने की उनकी कोशिशें, इन सभी बिंदुओं पर उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं थी। शायद यही कारण रहा हो कि उन्होंने इस्तीफे का रास्ता चुना।

विपक्ष का रुख और संदेह

वहीं, कांग्रेस और विपक्षी दलों का मानना है कि यह इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से ज्यादा राजनीतिक कारणों से दिया गया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि धनखड़ पूरी तरह से स्वस्थ थे और इस्तीफे का कोई संकेत नहीं दिया था। अब विपक्षी दल इस पूरे घटनाक्रम को सियासी दृष्टिकोण से देख रहे हैं और यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह कदम सरकार के खिलाफ था।

जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा देने पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत मीडिया से बातचित में कहती हैं, “आपकी तरह मैं भी हैरान हूँ, उन्होंने आज के लिए एक मीटिंग तय की थी, कल उन्हें राजस्थान जाना था। अचानक उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा। कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि वह अगस्त 2027 में रिटायर होंगे। प्रधानमंत्री की तरफ़ से भी एक पोस्ट आई है। लेकिन मुझे लगता है कि इस कहानी में कई किरदार हैं, कई परतें हैं। एक सीख भी है, जब आप किसी संवैधानिक पद पर हों, तो सिर्फ़ संविधान ही आपका मार्गदर्शक होना चाहिए…”

कार्यकाल कितना था बाकी?

अब उपराष्ट्रपति धनखड़ के कार्यकाल की बात करें तो उन्होंने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पद संभाला था और उनके 5 साल के कार्यकाल को अभी 3 साल भी पूरे नहीं हुए थे। उनका कार्यकाल 2027 तक था। वहीं, उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब विपक्षी नेताओं के साथ उनके रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे।

हरिवंश नारायण सिंह की भूमिका

खबरों की मानें तो, धनखड़ के इस्तीफे के बाद राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह कार्यवाहक सभापति की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह अब राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाएंगे। हालांकि, यह उनकी अस्थायी भूमिका होगी और नए उपराष्ट्रपति के चुनाव तक वह इसे संभालेंगे।

उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया

चलिए अब जानते हैं  कि भारतीय संविधान इस स्थिति के बारे में क्या कहता है। संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होने के 60 दिनों के भीतर नए उपराष्ट्रपति का चुनाव करना ज़रूरी है। यानी 19 सितंबर 2025 तक नए उपराष्ट्रपति का चुनाव हो जाएगा। चुनाव आयोग जल्द ही उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। इस चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद गुप्त मतदान के ज़रिए वोट डालेंगे।

नए उपराष्ट्रपति के लिए उम्मीदवार की तलाश

इसी बीच, एनडीए के पास बहुमत होने के कारण यह अटकलें शुरू हो गई हैं कि भाजपा किसे उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार के रूप में सामने लाएगी। भाजपा के पास कई विकल्प हो सकते हैं, जैसे राज्यपालों, अनुभवी नेताओं या केंद्रीय मंत्रियों में से किसी को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना जा सकता है।

भाजपा के पास क्या विकल्प?

बता दें, भाजपा के पास कई मजबूत नेताओं का एक समूह है, जिनमें से किसी को उपराष्ट्रपति के पद के लिए चुना जा सकता है। एक ओर संभावित उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को देखा जा रहा है, क्योंकि वह 2020 से इस पद पर कार्यरत हैं और उन्हें सरकार का पूरा विश्वास प्राप्त है।

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Religious Places Near Khatu Shyam: खाटू श्याम के पास छुपी हैं ये 10 धार्मिक स्थल, जो ...

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Religious Places Near Khatu Shyam: तिन बाण के धारी..हारे का सहारा खाटू श्याम हमारा.. ये शब्द सुनकर किसी भी इंसान के मन के अंदर अपार आस्था और भक्ति की भावना उत्पन्न हो सकती है। क्योंकि हमारे प्यारे खाटू श्याम जी हैं ही कुछ ऐसे जो मन में करुणा को भर देते हैं। शायद यही वजह है कि हर साल लाखों श्रद्धालु राजस्थान के खाटू श्याम जी मंदिर में बाबा श्याम की एक झलक पाने के लिए दौड़े चले आते हैं। वैसे तो खाटू श्याम मंदिर अपने आप में आध्यात्मिक केंद्र है लेकिन अगर आप आध्यात्मिकता को और करीब से जानना चाहते हैं तो इन 10 स्थानों का भी दौरा करें क्योंकि ये यात्रा आपकी खाटू श्याम जी की यात्रा को और भी यादगार बना देगी

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सांभर साल्ट लेक- Religious Places Near Khatu Shyam

सबसे पहले बात करते हैं सांभर साल्ट लेक की जो खाटू श्याम मंदिर से मात्र 40 किलोमीटर दूर है। आपको बता दें कि यह झील भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है, जिस वजह से यह पर्यटकों के लिए एक अद्भुत प्राकृतिक स्थल है। झील में खारे पानी के कारण पानी पर सफेद नमक की परतें जम जाती हैं और नीले आसमान के साथ इस नजारे को देखना किसी अद्भुत प्राकृतिक चमत्कार से कम नहीं है। अगर आप इतना सोचकर ही खुश हो रहे हैं, तो आपको बता दें कि पक्षी प्रेमियों के लिए यहां स्वर्ग जैसा माहौल है, क्योंकि यहां फ्लेमिंगो जैसे प्रवासी पक्षी देखे जा सकते हैं। इतना ही नहीं, आप यहां नमक बनाने की प्रक्रिया देख सकते हैं और पास के ऐतिहासिक सांभर कस्बे की सैर भी कर सकते हैं। अगर आप खाटू श्याम मंदिर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार यहां जरूर जाएं और ध्यान रखें कि यहां घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी तक का है।

शाकंभरी देवी मंदिर

अगर आपने सांभर साल्ट लेक घूमने का प्लान बना चुके हैं, तो आपको थोड़े से कदम और आगे बढ़कर शाकंभरी देवी मंदिर की यात्रा भी ज़रूर जाना चाहिए। देवी शाकंभरी को समर्पित यह मंदिर खाटू श्याम मंदिर से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की देवी को पोषण और फसल उगाने की देवी माना जाता है। यहाँ घूमने का सबसे सुखद समय अक्टूबर से मार्च तक का है।

लोहार्गल

सभी जानते हैं कि खाटू श्याम महाभारत काल से हैं और इसलिए हर खाटू भक्त को महाभारत काल से जुड़े धार्मिक स्थल लोहार्गल अवश्य जाना चाहिए। यह स्थान खाटू श्याम मंदिर से 55 किमी की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि लोहार्गल ही वह स्थान है जहाँ पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र शुद्ध किए थे। यह स्थान अपने प्राकृतिक झरनों और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है। हरे-भरे पहाड़ों से घिरा यह स्थान अगस्त से फरवरी के महीनों में सबसे अच्छा दिखाई देता है।

खाटू किला

अगर आप खाटू श्याम जी के दर्शन करने जाते हैं और पास में स्थित खाटू किला नहीं जाते, तो आपकी यात्रा अधूरी रह जाएगी। यह किला खाटू मंदिर से केवल 2 किमी दूर है, इसलिए आप वहाँ पैदल भी जा सकते हैं। इस किले में आपको एक ऐतिहासिक अनुभव होगा। वैसे, आपको बता दें कि इस किले में घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक का है।

खाचरियावास

खाटू श्याम मंदिर से लगभग 20 किलोमीटर दूर खाचरियावास नामक एक जगह है। राजस्थान के पारंपरिक जीवन का अनुभव करने के लिए आपको खाटू श्याम मंदिर के पास इससे बेहतर जगह नहीं मिलेगी। खाचरियावास गाँव में आप ऊँट की सवारी और राजस्थानी पारंपरिक भोजन का भरपूर आनंद ले सकते हैं। यहाँ आने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है।

हर्षनाथ मंदिर

खाटू श्याम से 35 किलोमीटर दूर हर्षनाथ पहाड़ियों पर भी आप जा सकते हैं। भगवान शिव को समर्पित हर्षनाथ मंदिर इन्हीं पहाड़ियों में स्थित है। मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर 10वीं शताब्दी का है, जिसके कारण इस मंदिर की बनावट बेहद खूबसूरत है। इतिहास प्रेमियों को इस मंदिर में अवश्य जाना चाहिए। अगर आप यहाँ जाने का मन बना चुके हैं, तो थोड़ा और इंतज़ार कर लीजिए क्योंकि यहाँ घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से जनवरी तक का है।

जीण माता मंदिर

खाटू श्याम की तरह, जीण माता मंदिर भी राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। जीण माता मंदिर खाटू श्याम से 30 किलोमीटर दूर स्थित है और यह मंदिर देवी जीण माता को समर्पित है। नवरात्रि के दौरान आपको यहाँ माता के दर्शन के लिए जरूर आना चाहिए। साथ ही, यहाँ हर साल दो बार मेला भी लगता है, जिसमें स्थानीय संगीत और नृत्य होता है।

देवगढ़ किला

राजस्थान अपने ऐतिहासिक किलों के लिए भी जाना जाता है। अगर आप भी खाटू श्याम की अपनी यात्रा के दौरान किसी शानदार किले का दौरा करना चाहते हैं, तो खाटू श्याम मंदिर से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवगढ़ किले की यात्रा अवश्य करें। यहाँ जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के महीने में है।

ताल छापर अभयारण्य

खाटू श्याम से 100 किलोमीटर दूर स्थित ताल छापर वाइल्डलाइफ लवर्स के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहाँ आपको कई ऐसी प्रजातियाँ देखने को मिलेंगी जो भारत में और कहीं नहीं मिलतीं। जैसे काला हिरण। अगर आप यहाँ आना चाहते हैं, तो अक्टूबर से मार्च के महीनों में अपनी टिकटें बुक करा लें।

सीकर

अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध, सीकर शहर में स्थित हवेलियाँ पौराणिक कथाओं की झलक पेश करती हैं। वैसे तो सीकर में घूमने के लिए कई जगहें हैं, लेकिन आपको यहाँ के बाज़ार में ज़रूर जाना चाहिए, जहाँ आप ट्रेडिशनल हैंडक्राफ्ट और राजस्थानी कपड़े खरीद सकते हैं। यह खाटू श्याम से 25 किमी दूर स्थित है। इसके अलावा, यहाँ घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से मार्च तक है।

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Saiyaara Actress Aneet Padda: मोहित सूरी ने ‘सैयारा’ में अनीत पड्डा को क्...

Saiyaara Actress Aneet Padda: फिल्म इंडस्ट्री में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो दर्शकों को न सिर्फ अपनी कहानी से, बल्कि अपनी कास्टिंग से भी अपना दीवाना बना लेती हैं। मोहित सूरी की फिल्म ‘सैयारा’ ने रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया है। फिल्म न केवल अच्छी कमाई कर रही है, बल्कि लोगों को भी खूब पसंद आ रही है। अब फिल्म के डायरेक्टर मोहित सूरी ने खुलासा किया है कि उन्होंने फिल्म में अनीत पड्डा को क्यों कास्ट किया। आइए, जानते हैं मोहित सूरी के इस फैसले के पीछे की कहानी।

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क्या बोले मोहित सूरी? (Saiyaara Actress Aneet Padda)

मोहित सूरी ने बॉलीवुड हंगामा से बातचीत में कहा, “मुझे फिल्म के लिए ऐसे अभिनेता की तलाश थी, जो बिल्कुल रियल लगे, और उसकी उम्र भी सही हो।” मोहित ने आगे बताया कि फिल्म के लिए अनीत को कास्ट करने में उन्हें लगभग चार से पांच महीने का वक्त लगा। “मैं चाहता था कि कास्ट की गई एक्ट्रेस 20 से 22 साल की हो और उसने अपने चेहरे और शरीर पर कोई भी कॉस्मेटिक बदलाव न करवाया हो।” मोहित की इस कास्टिंग से यह साफ है कि उन्होंने अनीत पड्डा को चुनने में जो समझदारी दिखाई, वह फिल्म के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई।

 

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कमाल की एक्ट्रेस हैं अनीत

मोहित सूरी ने अनीत पड्डा की एक्टिंग की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद नहीं करता था कि मुझे इतनी बड़ी जरूरत पड़ेगी, लेकिन अनीत सच में एक बेहतरीन एक्ट्रेस हैं।” अनीत फिल्म में अमृतसर की एक पंजाबी लड़की का किरदार निभा रही हैं, जो मिडिल क्लास परिवार से है। मोहित ने कहा, “वह इस रोल में बिल्कुल फिट बैठती हैं, और उनकी एक्टिंग को सभी ने पसंद किया।”

अनीत पड्डा की एक्टिंग की तारीफ

मोहित सूरी ने अनीत की एक्टिंग की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने कई और लोगों को भी इस रोल के लिए ऑडिशन देने के लिए बुलाया था, लेकिन अनीत में उन्हें कुछ अलग नजर आया। अनीत ने फिल्म में एक जर्नलिस्ट का किरदार निभाया है, जो गाना भी लिख सकती है। अनीत की और अहान पांडे की जोड़ी को फिल्म में दर्शकों से खासा प्यार मिला है।

फिल्म की सफलता पर चिंता और भरोसा

मोहित सूरी ने अपनी फिल्म ‘सैयारा’ की सफलता को लेकर भी अपनी चिंताओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया, “मैंने इस फिल्म में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन मुझे डर था क्योंकि उस समय सिर्फ एक्शन फिल्में और स्टारकास्ट वाली फिल्में चल रही थीं।” उन्होंने आगे कहा, “जब मैंने आदित्य चोपड़ा से यह फिल्म बनाई थी, तो उन्होंने कहा था कि शायद यह फिल्म नहीं चलेगी क्योंकि स्क्रिप्ट 25 साल के लोगों के लिए है।” मोहित ने आदित्य चोपड़ा से कहा था, “मुझे जोखिम लेने दीजिए, आप बस मुझसे वादा करें कि आप अपनी बेस्ट फिल्म बनाएंगे।”

फिल्म का शानदार कलेक्शन

फिल्म की रिलीज के बाद, ‘सैयारा’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया। ओपनिंग डे पर फिल्म ने 21 करोड़ रुपये की कमाई की, और अगले दिन यानि शनिवार को 25 करोड़ रुपये की कमाई की। तीन दिन में ही फिल्म ने 46 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया था। रविवार को फिल्म ने अभूतपूर्व 37 करोड़ रुपये की कमाई की, और कुल मिलाकर फिल्म ने 83 करोड़ रुपये की कमाई की। इस तरह से यह फिल्म 2025 की नौवीं सबसे बड़ी हिंदी हिट बन गई।

फिल्म की ब्लॉकबस्टर कमाई

‘सैयारा’ ने ब्लॉकबस्टर कमाई की, जो फिल्म इंडस्ट्री में किसी भी फिल्म के लिए बड़ी बात है। फिल्म में नए चेहरे अहान पांडे और अनीत पड्डा थे, जिनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। फिल्म की रोमांटिक और इमोशनल कहानी ने लोगों को आकर्षित किया, और इसका असर बॉक्स ऑफिस पर भी साफ दिखाई दिया।

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