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Shri Krishna First Name: अनिरुद्धाचार्य को तो नहीं पता लेकिन क्या आप जानते है भगवान श...

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Shri Krishna First Name: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और कथावाचक अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya) का एक वीडियो हाल ही में वायरल हुआ था, जिस पर खूब विवाद हुआ था। उस वीडियो में अखिलेश यादव अनिरुद्धाचार्य से पूछते हैं, “जब भगवान कृष्ण ने देवकी के गर्भ से जन्म लिया, तो माता ने उन्हें सबसे पहले क्या नाम से पुकारा?” इस सवाल के जवाब में अनिरुद्धाचार्य कुछ पल सोचते हैं और फिर जवाब देते हैं ‘वासुदेव’। यह जवाब सुनकर अखिलेश यादव संतुष्ट नहीं दिखते और कहते हैं, “यहीं से आपके और हमारे रास्ते अलग हो जाते हैं।” जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई कि इस सवाल का सही जवाब क्या है? अगर आप भी इस सवाल का सही जवाब जानना चाहते हैं तो खबर को अंत तक पढ़ते रहिए।

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माता देवकी ने किस नाम से पुकारा? (Shri Krishna First Name)

शास्त्रों की बात करें तो, इस प्रश्न का कोई सटीक उत्तर नहीं मिलता कि जब भगवान कृष्ण देवकी के गर्भ से प्रकट हुए, तो माता ने उन्हें किस नाम से पुकारा? आमतौर पर शिशु के जन्म के समय माता का पूरा ध्यान शिशु के कोमल शरीर को गोद में लेने और उस प्रेम-स्नेह में ही होता है, जिसमें नामकरण के प्रश्न पर ध्यान नहीं दिया जाता।

हालांकि, शास्त्री विनोदजी बताते हैं कि श्रीराम और श्रीकृष्ण के जन्म के समय के प्रसंगों में यह स्पष्ट रूप से नहीं आता कि माता ने उन्हें पहले नाम से कैसे पुकारा। शास्त्रों में यह कथा तो मिलती है कि श्रीराम और श्रीकृष्ण के जन्म के समय उन्हें भगवान के अवतार के रूप में देखा गया। तो चलिए इस प्रश्न का सही उत्तर जानते हैं।

श्रीमद्भागवत में भगवान के प्रकट होने का वर्णन

प्राचीन ग्रंथों में भगवान कृष्ण के प्रकट होने के समय का विस्तृत वर्णन मिलता है। श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के अध्याय 3 में इसका उल्लेख मिलता है, जहां बताया गया है कि भगवान कृष्ण चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए थे। इसी समय माता देवकी ने उन्हें भगवान विष्णु के रूप में देखा था। यह भी उल्लेख मिलता है कि भगवान कृष्ण मध्यरात्रि के समय प्रकट हुए थे, जब चारों ओर अंधकार था और संसार में कोई प्रकाश नहीं था।

भगवान के नामों का महत्व

वहीं दूसरी ओर, शास्त्रों में भगवान के नामों का महत्व गहराई से वर्णित है। श्रीकृष्ण का नाम ‘मधुसूदन’ भी काफी प्रसिद्ध है और यह नाम कई प्रसंगों में आया है। जैसे श्रीमद्भागवत में माता देवकी ने उन्हें ‘मधुसूदन’ नाम से पुकारा था, वहीं महाभारत के प्रसंगों में भी इस नाम का उल्लेख हुआ है।

नामकरण संस्कार और भगवान श्रीकृष्ण

वहीं अगर हम इतिहास के पान उठाकर देखें तो, भगवान श्रीकृष्ण का नामकरण संस्कार श्रीगोकुल में यदुवंशियों के कुल पुरोहित गर्गाचार्य द्वारा किया गया था। गर्गाचार्य ने नंद बाबा के गांव में भगवान श्रीकृष्ण और उनके भाई बलराम का नामकरण किया। श्रीकृष्ण को ‘कृष्ण’ नाम दिया गया क्योंकि वह सांवले थे और उनके नाम के साथ जुड़ा हुआ यह वर्णन उनके विभिन्न युगों में विभिन्न रूपों को दर्शाता है।

अब अगर अखिलेश यादव के सवाल के जवाब पर गौर करें, तो माता देवकी ने श्रीकृष्ण को विभिन्न नामों से पुकारा होगा, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि जन्म के तुरंत बाद उनका नाम क्या था। दूसरी ओर, एक तर्क यह भी है कि भगवान के अनेक नामों में से ‘मधुसूदन’ और ‘विष्णु’ उनके प्रथम नाम हो सकते हैं, जैसा कि श्रीमद्भागवत में वर्णित है।

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मॉनसून में रहें सावधान! बढ़ जाता है त्वचा संक्रमण का जोखिम, जानें बचाव के उपाय

Safety precautions during rainy season: अक्सर बरसात के मौसम (Rainy Season) में त्वचा संबंधी समस्याएं आम हो जाती हैं। नमी और उमस के कारण फंगल, बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण (Fungal, bacterial, and viral infections) का खतरा बढ़ जाता है। इन संक्रमणों (Infections) से बचने और अपनी त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। तो चलिए आपको इस लेख में विस्तार से त्वचा संक्रमण से बचने के उपाय के बारे में बताते है।

स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान

दिन में कम से कम एक बार एंटीबैक्टीरियल साबुन (Antibacterial Soap) से नहाएँ, खासकर अगर आप बाहर रहे हों या पसीना आ रहा हो। नहाने या बारिश में भीगने के बाद अपनी स्किन (Skin) को अच्छी तरह सुखाएँ, खासकर शरीर के मोड़ों (जैसे बगल, जांघों के बीच और उंगलियों के बीच) पर। नमी से फंगल संक्रमण हो सकता है। हमेशा सूखे और साफ कपड़े पहनें। सिंथेटिक कपड़ों (Synthetic clothing) की बजाय सूती कपड़े (Cotton fabric) पहनना बेहतर है क्योंकि ये नमी सोख लेते हैं और हवा का संचार बेहतर करते हैं।

सही खान-पान और हाइड्रेशन

बारिश के मौसम में त्वचा (Skin) के स्वास्थ्य के लिए शरीर को हाइड्रेटेड (Hydrated) रखना ज़रूरी है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। अपने आहार में फल, सब्ज़ियाँ और एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidants) से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। इससे आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मज़बूत होगी और संक्रमणों (Infections) से लड़ने में मदद मिलेगी।

अन्य बचाव के उपाय

बरसात के समय हो सके तो खुले जूते या सैंडल पहनें ताकि पैर सांस ले सकें और नमी जमा न हो। अगर जूते और मोज़े गीले हो जाएँ तो तुरंत बदल दें। संक्रमित जगह को बार-बार न छुएँ, भले ही उसमें खुजली हो, क्योंकि इससे संक्रमण फैल सकता है। अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहाँ बहुत ज़्यादा नमी है, तो आप त्वचा की सिलवटों पर एंटीफंगल पाउडर (Antifungal Powder) का इस्तेमाल कर सकते हैं। व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें और दूसरे लोगों के तौलिये, कपड़े या अन्य निजी सामान का इस्तेमाल न करें।

इस मौसम में अपनी त्वचा पर कठोर रासायनिक उत्पादों के इस्तेमाल से भी बचें क्योंकि ये त्वचा को और भी संवेदनशील बना सकते हैं। इन आसान उपायों को अपनाकर आप मानसून में होने वाले त्वचा संक्रमणों से खुद को बचा सकते हैं और स्वस्थ त्वचा का आनंद ले सकते हैं। क्या आप किसी विशिष्ट प्रकार के त्वचा संक्रमण के बारे में अधिक जानना चाहेंगे?

Vice Presidential Election Process: जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद के ...

Vice Presidential Election Process: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Vice President Jagdeep Dhankhar) ने सोमवार रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। आजाद भारत में यह पहली बार है जब किसी उपराष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के बीच में ही इस्तीफा (Jagdeep Dhankhar Resign News) दे दिया हो। वैसे तो उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया, लेकिन उनके इस्तीफे के समय और हालिया गतिविधियों ने इसे लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके इस्तीफे के बीच इस बात पर गरमागरम बहस चल रही है कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा, वहीं इस पद के लिए कुछ नामों पर भी चर्चा हो रही है।

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धनखड़ का इस्तीफा: स्वास्थ्य या राजनीति? (Vice Presidential Election Process)

आइए पहले जानते हैं कि धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) को भेजे अपने इस्तीफे में क्या कहा, उन्होंने लिखा कि स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देने के लिए वह तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे सिर्फ स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, लेकिन कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे कुछ और कारण भी हो सकते हैं। उनके इस्तीफे की टाइमिंग और पहले दिन उनकी सक्रियता से यह सवाल उठता है कि क्या उनका इस्तीफा सिर्फ स्वास्थ्य के कारण था या इसके पीछे किसी राजनीतिक फैसले की भी भूमिका हो सकती है।

अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा?

वहीं, धनखड़ के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अब अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होता है। फिलहाल, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह कार्यवाहक सभापति की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह अब राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाएंगे। हालांकि, यह उनकी अस्थायी भूमिका होगी और नए उपराष्ट्रपति के चुनाव तक वह इसे संभालेंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें, नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन यह साफ नहीं है कि सत्ताधारी गठबंधन एनडीए और विपक्ष किसे अपना उम्मीदवार बनाएंगे।

सत्ताधारी दल की नजरें: मनोज सिन्हा, नीतीश कुमार या महिला उम्मीदवार?

उम्मीदवारों की सूची में एनडीए नेताओं ने नामों पर चर्चा शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के नामों की चर्चा हो रही है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यूपी को ध्यान में रखते हुए बीजेपी यह पद मनोज सिन्हा को दे सकती है, जबकि बिहार चुनाव को देखते हुए यह पद नीतीश कुमार को ऑफर किया जा सकता है। लेकिन आधिकारिक तौर पर इन नामों को लेकर अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है

बीजेपी का प्रयास: मजबूत और दमदार उम्मीदवार

भाजपा के लिए उपराष्ट्रपति पद पर कोई भी नाम चुनने से पहले यह जरूरी है कि वह एक मजबूत और प्रभावशाली नेता का चयन करे, जो राज्यसभा की कार्यवाही को प्रभावी तरीके से चला सके और साथ ही पार्टी का संदेश भी दे सके। बीजेपी के पास राज्यसभा में बहुमत है, और वह इस पद पर एक ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करना चाहेगी, जो विपक्ष के साथ संतुलन बनाए रख सके और पार्टी के उद्देश्यों को आगे बढ़ा सके।

विपक्ष का क्या कहना है?

इसी बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के इस्तीफे को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह घटना जितनी अकल्पनीय है, उतनी ही चौंकाने वाली भी है। रमेश के मुताबिक, वह 5 बजे तक धनखड़ के साथ थे और शाम 7:30 बजे उनकी फोन पर बात भी हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि स्वास्थ्य कारणों को प्राथमिकता देनी चाहिए, लेकिन इस्तीफे के पीछे कुछ और कारण हो सकते हैं, जिनका खुलासा अब तक नहीं हुआ है।

उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया

उम्मीदवार के नाम पर चर्चा करते हुए, आइए अब उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया के बारे में भी जान लें। भारतीय संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष होता है, जिसमें केवल सांसदों को ही वोट देने का अधिकार होता है। चुनाव के लिए, उम्मीदवार को कम से कम 20 सांसदों के प्रस्तावकों और समर्थकों की आवश्यकता होती है। चुनाव प्रणाली के तहत, सभी सांसदों को प्राथमिकता के आधार पर अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देना होता है। यदि किसी भी उम्मीदवार को आवश्यक बहुमत नहीं मिलता है, तो चुनावी प्रक्रिया जारी रहती है और फिर सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को बाहर कर दिया जाता है, उनके वोट अगले उम्मीदवार को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।

कौन बनेगा अगला उपराष्ट्रपति?

धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है और इसे लेकर राजनीतिक दलों में हलचल मची हुई है। भाजपा और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने उम्मीदवारों पर विचार कर रहे हैं। यह चुनाव निश्चित रूप से भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा, क्योंकि इससे न केवल उपराष्ट्रपति पद का फैसला होगा, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच नए समीकरण भी सामने आएंगे।

बता दें, संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होने के 60 दिनों के भीतर नए उपराष्ट्रपति का चुनाव करना ज़रूरी है। यानी 19 सितंबर 2025 तक नए उपराष्ट्रपति का चुनाव हो जाएगा। चुनाव आयोग जल्द ही उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है।

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Jagdeep Dhankhar Resign: जगदीप धनखड़ ने सेहत का हवाला देकर सियासत को कहा अलविदा! जाने...

भारतीय राजनीति में इस समय भूचाल आ गया है और इसके पीछे की वजह हैं भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा (Jagdeep Dhankhar Resign)। दरअसल, खबर आ रही है कि उपराष्ट्रपति धनखड़ (Vice President Jagdeep Dhankhar) ने सोमवार रात को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बताई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को लेकर चर्चाओं का माहौल गर्म हो गया है। हालिया गतिविधियों को देखकर उनके इस्तीफे की टाइमिंग पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। चलिए, आपको विस्तार से बताते हैं कि क्या उनका इस्तीफा सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी था, या इसके पीछे कुछ और सियासत हो सकती है।

फिलहाल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति ने आगे की कार्रवाई के लिए उनका इस्तीफा गृह मंत्रालय को भेज दिया है। खबरों की मानें तो, धनखड़ विदाई समारोह में शामिल नहीं होंगे और न ही कोई विदाई भाषण देंगे।

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इस्तीफे से पहले की सक्रियता- Jagdeep Dhankhar Resign

आपको बता दें कि यह इस्तीफ़ा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह ठीक ऐसे समय आया है जब इस साल संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session 2025) शुरू हुआ है। गौर करने वाली बात यह है कि इस दिन वह पूरी तरह सक्रिय थे, उन्होंने विपक्षी नेताओं से मुलाकात की और राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन भी किया। इसके अलावा, उन्होंने महाभियोग प्रस्ताव पर औपचारिक घोषणा भी की। अब सवाल यह उठता है कि अगर स्वास्थ्य ही कारण होता, तो क्या वह इतनी सारी गतिविधियों में शामिल होते? क्या उनकी यह सक्रियता इस बात का संकेत नहीं है कि इस्तीफ़े के पीछे कोई और वजह हो सकती है?

 

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महाभियोग प्रस्ताव से ठीक पहले इस्तीफा

इतना ही नहीं, इस्तीफ़े से कुछ घंटे पहले ही राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी। विपक्ष ने जस्टिस वर्मा के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया, जिसे धनखड़ ने स्वीकार कर लिया और उसी दिन सदन में बता दिया। उन्होंने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और क़ानून मंत्री से इसकी पुष्टि भी ली। उनकी सक्रियता यह साबित कर रही है कि इस्तीफ़ा देने से पहले वे अपनी संवैधानिक प्रक्रियाओं को भी आगे बढ़ा रहे थे।

राजनाथ सिंह के कार्यालय में हलचल

सूत्रों की मानें तो इस्तीफ़े से कुछ देर पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) के कार्यालय में मची थी। भाजपा सांसदों से कोरे कागजों पर दस्तखत करवाए गए। कुछ सांसद आए और बिना कुछ कहे चले गए। इसके बाद ही धनखड़ के इस्तीफ़े की बात सामने आई। अगर इन कड़ियों को जोड़कर देखा जाए तो साफ है कि यह इस्तीफ़ा अचानक नहीं बल्कि पूर्व नियोजित रहा होगा।

सरकार से टकराव: क्या कारण था इस्तीफा?

वहीं, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धनखड़ का इस्तीफा सरकार से कुछ मुद्दों पर मतभेद के कारण हो सकता है। किसानों के मुद्दे, महाभियोग प्रस्ताव की स्वीकृति, या विपक्ष के साथ संतुलन साधने की उनकी कोशिशें, इन सभी बिंदुओं पर उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं थी। शायद यही कारण रहा हो कि उन्होंने इस्तीफे का रास्ता चुना।

विपक्ष का रुख और संदेह

वहीं, कांग्रेस और विपक्षी दलों का मानना है कि यह इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से ज्यादा राजनीतिक कारणों से दिया गया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि धनखड़ पूरी तरह से स्वस्थ थे और इस्तीफे का कोई संकेत नहीं दिया था। अब विपक्षी दल इस पूरे घटनाक्रम को सियासी दृष्टिकोण से देख रहे हैं और यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह कदम सरकार के खिलाफ था।

जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा देने पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत मीडिया से बातचित में कहती हैं, “आपकी तरह मैं भी हैरान हूँ, उन्होंने आज के लिए एक मीटिंग तय की थी, कल उन्हें राजस्थान जाना था। अचानक उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा। कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि वह अगस्त 2027 में रिटायर होंगे। प्रधानमंत्री की तरफ़ से भी एक पोस्ट आई है। लेकिन मुझे लगता है कि इस कहानी में कई किरदार हैं, कई परतें हैं। एक सीख भी है, जब आप किसी संवैधानिक पद पर हों, तो सिर्फ़ संविधान ही आपका मार्गदर्शक होना चाहिए…”

कार्यकाल कितना था बाकी?

अब उपराष्ट्रपति धनखड़ के कार्यकाल की बात करें तो उन्होंने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पद संभाला था और उनके 5 साल के कार्यकाल को अभी 3 साल भी पूरे नहीं हुए थे। उनका कार्यकाल 2027 तक था। वहीं, उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब विपक्षी नेताओं के साथ उनके रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे।

हरिवंश नारायण सिंह की भूमिका

खबरों की मानें तो, धनखड़ के इस्तीफे के बाद राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह कार्यवाहक सभापति की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह अब राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाएंगे। हालांकि, यह उनकी अस्थायी भूमिका होगी और नए उपराष्ट्रपति के चुनाव तक वह इसे संभालेंगे।

उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया

चलिए अब जानते हैं  कि भारतीय संविधान इस स्थिति के बारे में क्या कहता है। संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होने के 60 दिनों के भीतर नए उपराष्ट्रपति का चुनाव करना ज़रूरी है। यानी 19 सितंबर 2025 तक नए उपराष्ट्रपति का चुनाव हो जाएगा। चुनाव आयोग जल्द ही उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। इस चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद गुप्त मतदान के ज़रिए वोट डालेंगे।

नए उपराष्ट्रपति के लिए उम्मीदवार की तलाश

इसी बीच, एनडीए के पास बहुमत होने के कारण यह अटकलें शुरू हो गई हैं कि भाजपा किसे उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार के रूप में सामने लाएगी। भाजपा के पास कई विकल्प हो सकते हैं, जैसे राज्यपालों, अनुभवी नेताओं या केंद्रीय मंत्रियों में से किसी को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना जा सकता है।

भाजपा के पास क्या विकल्प?

बता दें, भाजपा के पास कई मजबूत नेताओं का एक समूह है, जिनमें से किसी को उपराष्ट्रपति के पद के लिए चुना जा सकता है। एक ओर संभावित उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को देखा जा रहा है, क्योंकि वह 2020 से इस पद पर कार्यरत हैं और उन्हें सरकार का पूरा विश्वास प्राप्त है।

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Religious Places Near Khatu Shyam: खाटू श्याम के पास छुपी हैं ये 10 धार्मिक स्थल, जो ...

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Religious Places Near Khatu Shyam: तिन बाण के धारी..हारे का सहारा खाटू श्याम हमारा.. ये शब्द सुनकर किसी भी इंसान के मन के अंदर अपार आस्था और भक्ति की भावना उत्पन्न हो सकती है। क्योंकि हमारे प्यारे खाटू श्याम जी हैं ही कुछ ऐसे जो मन में करुणा को भर देते हैं। शायद यही वजह है कि हर साल लाखों श्रद्धालु राजस्थान के खाटू श्याम जी मंदिर में बाबा श्याम की एक झलक पाने के लिए दौड़े चले आते हैं। वैसे तो खाटू श्याम मंदिर अपने आप में आध्यात्मिक केंद्र है लेकिन अगर आप आध्यात्मिकता को और करीब से जानना चाहते हैं तो इन 10 स्थानों का भी दौरा करें क्योंकि ये यात्रा आपकी खाटू श्याम जी की यात्रा को और भी यादगार बना देगी

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सांभर साल्ट लेक- Religious Places Near Khatu Shyam

सबसे पहले बात करते हैं सांभर साल्ट लेक की जो खाटू श्याम मंदिर से मात्र 40 किलोमीटर दूर है। आपको बता दें कि यह झील भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है, जिस वजह से यह पर्यटकों के लिए एक अद्भुत प्राकृतिक स्थल है। झील में खारे पानी के कारण पानी पर सफेद नमक की परतें जम जाती हैं और नीले आसमान के साथ इस नजारे को देखना किसी अद्भुत प्राकृतिक चमत्कार से कम नहीं है। अगर आप इतना सोचकर ही खुश हो रहे हैं, तो आपको बता दें कि पक्षी प्रेमियों के लिए यहां स्वर्ग जैसा माहौल है, क्योंकि यहां फ्लेमिंगो जैसे प्रवासी पक्षी देखे जा सकते हैं। इतना ही नहीं, आप यहां नमक बनाने की प्रक्रिया देख सकते हैं और पास के ऐतिहासिक सांभर कस्बे की सैर भी कर सकते हैं। अगर आप खाटू श्याम मंदिर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार यहां जरूर जाएं और ध्यान रखें कि यहां घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी तक का है।

शाकंभरी देवी मंदिर

अगर आपने सांभर साल्ट लेक घूमने का प्लान बना चुके हैं, तो आपको थोड़े से कदम और आगे बढ़कर शाकंभरी देवी मंदिर की यात्रा भी ज़रूर जाना चाहिए। देवी शाकंभरी को समर्पित यह मंदिर खाटू श्याम मंदिर से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की देवी को पोषण और फसल उगाने की देवी माना जाता है। यहाँ घूमने का सबसे सुखद समय अक्टूबर से मार्च तक का है।

लोहार्गल

सभी जानते हैं कि खाटू श्याम महाभारत काल से हैं और इसलिए हर खाटू भक्त को महाभारत काल से जुड़े धार्मिक स्थल लोहार्गल अवश्य जाना चाहिए। यह स्थान खाटू श्याम मंदिर से 55 किमी की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि लोहार्गल ही वह स्थान है जहाँ पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र शुद्ध किए थे। यह स्थान अपने प्राकृतिक झरनों और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है। हरे-भरे पहाड़ों से घिरा यह स्थान अगस्त से फरवरी के महीनों में सबसे अच्छा दिखाई देता है।

खाटू किला

अगर आप खाटू श्याम जी के दर्शन करने जाते हैं और पास में स्थित खाटू किला नहीं जाते, तो आपकी यात्रा अधूरी रह जाएगी। यह किला खाटू मंदिर से केवल 2 किमी दूर है, इसलिए आप वहाँ पैदल भी जा सकते हैं। इस किले में आपको एक ऐतिहासिक अनुभव होगा। वैसे, आपको बता दें कि इस किले में घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक का है।

खाचरियावास

खाटू श्याम मंदिर से लगभग 20 किलोमीटर दूर खाचरियावास नामक एक जगह है। राजस्थान के पारंपरिक जीवन का अनुभव करने के लिए आपको खाटू श्याम मंदिर के पास इससे बेहतर जगह नहीं मिलेगी। खाचरियावास गाँव में आप ऊँट की सवारी और राजस्थानी पारंपरिक भोजन का भरपूर आनंद ले सकते हैं। यहाँ आने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है।

हर्षनाथ मंदिर

खाटू श्याम से 35 किलोमीटर दूर हर्षनाथ पहाड़ियों पर भी आप जा सकते हैं। भगवान शिव को समर्पित हर्षनाथ मंदिर इन्हीं पहाड़ियों में स्थित है। मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर 10वीं शताब्दी का है, जिसके कारण इस मंदिर की बनावट बेहद खूबसूरत है। इतिहास प्रेमियों को इस मंदिर में अवश्य जाना चाहिए। अगर आप यहाँ जाने का मन बना चुके हैं, तो थोड़ा और इंतज़ार कर लीजिए क्योंकि यहाँ घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से जनवरी तक का है।

जीण माता मंदिर

खाटू श्याम की तरह, जीण माता मंदिर भी राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। जीण माता मंदिर खाटू श्याम से 30 किलोमीटर दूर स्थित है और यह मंदिर देवी जीण माता को समर्पित है। नवरात्रि के दौरान आपको यहाँ माता के दर्शन के लिए जरूर आना चाहिए। साथ ही, यहाँ हर साल दो बार मेला भी लगता है, जिसमें स्थानीय संगीत और नृत्य होता है।

देवगढ़ किला

राजस्थान अपने ऐतिहासिक किलों के लिए भी जाना जाता है। अगर आप भी खाटू श्याम की अपनी यात्रा के दौरान किसी शानदार किले का दौरा करना चाहते हैं, तो खाटू श्याम मंदिर से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवगढ़ किले की यात्रा अवश्य करें। यहाँ जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के महीने में है।

ताल छापर अभयारण्य

खाटू श्याम से 100 किलोमीटर दूर स्थित ताल छापर वाइल्डलाइफ लवर्स के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहाँ आपको कई ऐसी प्रजातियाँ देखने को मिलेंगी जो भारत में और कहीं नहीं मिलतीं। जैसे काला हिरण। अगर आप यहाँ आना चाहते हैं, तो अक्टूबर से मार्च के महीनों में अपनी टिकटें बुक करा लें।

सीकर

अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध, सीकर शहर में स्थित हवेलियाँ पौराणिक कथाओं की झलक पेश करती हैं। वैसे तो सीकर में घूमने के लिए कई जगहें हैं, लेकिन आपको यहाँ के बाज़ार में ज़रूर जाना चाहिए, जहाँ आप ट्रेडिशनल हैंडक्राफ्ट और राजस्थानी कपड़े खरीद सकते हैं। यह खाटू श्याम से 25 किमी दूर स्थित है। इसके अलावा, यहाँ घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से मार्च तक है।

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Saiyaara Actress Aneet Padda: मोहित सूरी ने ‘सैयारा’ में अनीत पड्डा को क्...

Saiyaara Actress Aneet Padda: फिल्म इंडस्ट्री में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो दर्शकों को न सिर्फ अपनी कहानी से, बल्कि अपनी कास्टिंग से भी अपना दीवाना बना लेती हैं। मोहित सूरी की फिल्म ‘सैयारा’ ने रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया है। फिल्म न केवल अच्छी कमाई कर रही है, बल्कि लोगों को भी खूब पसंद आ रही है। अब फिल्म के डायरेक्टर मोहित सूरी ने खुलासा किया है कि उन्होंने फिल्म में अनीत पड्डा को क्यों कास्ट किया। आइए, जानते हैं मोहित सूरी के इस फैसले के पीछे की कहानी।

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क्या बोले मोहित सूरी? (Saiyaara Actress Aneet Padda)

मोहित सूरी ने बॉलीवुड हंगामा से बातचीत में कहा, “मुझे फिल्म के लिए ऐसे अभिनेता की तलाश थी, जो बिल्कुल रियल लगे, और उसकी उम्र भी सही हो।” मोहित ने आगे बताया कि फिल्म के लिए अनीत को कास्ट करने में उन्हें लगभग चार से पांच महीने का वक्त लगा। “मैं चाहता था कि कास्ट की गई एक्ट्रेस 20 से 22 साल की हो और उसने अपने चेहरे और शरीर पर कोई भी कॉस्मेटिक बदलाव न करवाया हो।” मोहित की इस कास्टिंग से यह साफ है कि उन्होंने अनीत पड्डा को चुनने में जो समझदारी दिखाई, वह फिल्म के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई।

 

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कमाल की एक्ट्रेस हैं अनीत

मोहित सूरी ने अनीत पड्डा की एक्टिंग की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद नहीं करता था कि मुझे इतनी बड़ी जरूरत पड़ेगी, लेकिन अनीत सच में एक बेहतरीन एक्ट्रेस हैं।” अनीत फिल्म में अमृतसर की एक पंजाबी लड़की का किरदार निभा रही हैं, जो मिडिल क्लास परिवार से है। मोहित ने कहा, “वह इस रोल में बिल्कुल फिट बैठती हैं, और उनकी एक्टिंग को सभी ने पसंद किया।”

अनीत पड्डा की एक्टिंग की तारीफ

मोहित सूरी ने अनीत की एक्टिंग की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने कई और लोगों को भी इस रोल के लिए ऑडिशन देने के लिए बुलाया था, लेकिन अनीत में उन्हें कुछ अलग नजर आया। अनीत ने फिल्म में एक जर्नलिस्ट का किरदार निभाया है, जो गाना भी लिख सकती है। अनीत की और अहान पांडे की जोड़ी को फिल्म में दर्शकों से खासा प्यार मिला है।

फिल्म की सफलता पर चिंता और भरोसा

मोहित सूरी ने अपनी फिल्म ‘सैयारा’ की सफलता को लेकर भी अपनी चिंताओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया, “मैंने इस फिल्म में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन मुझे डर था क्योंकि उस समय सिर्फ एक्शन फिल्में और स्टारकास्ट वाली फिल्में चल रही थीं।” उन्होंने आगे कहा, “जब मैंने आदित्य चोपड़ा से यह फिल्म बनाई थी, तो उन्होंने कहा था कि शायद यह फिल्म नहीं चलेगी क्योंकि स्क्रिप्ट 25 साल के लोगों के लिए है।” मोहित ने आदित्य चोपड़ा से कहा था, “मुझे जोखिम लेने दीजिए, आप बस मुझसे वादा करें कि आप अपनी बेस्ट फिल्म बनाएंगे।”

फिल्म का शानदार कलेक्शन

फिल्म की रिलीज के बाद, ‘सैयारा’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया। ओपनिंग डे पर फिल्म ने 21 करोड़ रुपये की कमाई की, और अगले दिन यानि शनिवार को 25 करोड़ रुपये की कमाई की। तीन दिन में ही फिल्म ने 46 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया था। रविवार को फिल्म ने अभूतपूर्व 37 करोड़ रुपये की कमाई की, और कुल मिलाकर फिल्म ने 83 करोड़ रुपये की कमाई की। इस तरह से यह फिल्म 2025 की नौवीं सबसे बड़ी हिंदी हिट बन गई।

फिल्म की ब्लॉकबस्टर कमाई

‘सैयारा’ ने ब्लॉकबस्टर कमाई की, जो फिल्म इंडस्ट्री में किसी भी फिल्म के लिए बड़ी बात है। फिल्म में नए चेहरे अहान पांडे और अनीत पड्डा थे, जिनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। फिल्म की रोमांटिक और इमोशनल कहानी ने लोगों को आकर्षित किया, और इसका असर बॉक्स ऑफिस पर भी साफ दिखाई दिया।

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Dhaka Plane Crash: नारियल पेड़ों से टकरा कर स्कूल पर गिरा विमान, ढाका में हुआ भीषण प्...

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Dhaka Plane Crash: बांग्लादेश की राजधानी ढाका के उत्तरा क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक भीषण विमान हादसा हुआ, जिसने इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। इस घटना में बांग्लादेश एयरफोर्स का एक एफ-7 ट्रेनर विमान एक कॉलेज की बिल्डिंग पर गिर गया, जिससे इलाके में जोरदार धमाका हुआ और आग की लपटें उठने लगीं। प्लेन एफ-7 फाइटर जेट एक चाइनीज एयरक्राफ्ट है। हादसा उस समय हुआ जब कॉलेज में क्लास चल रही थी और बच्चे अपने टीचर के साथ कॉलेज में मौजूद थे। इसके साथ ही कुछ अभिभावक गेट पर अपने बच्चों का इंतजार कर रहे थे।

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हादसे के बाद की स्थिति- Dhaka Plane Crash

आस-पास के लोग धमाके की आवाज सुनकर डर के मारे इधर-उधर भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। विमान ने सुबह 1:06 बजे उड़ान भरी थी, और महज 24 मिनट बाद, करीब 1:30 बजे, वह उत्तरा क्षेत्र में स्थित मिलस्टोन स्कूल एंड कॉलेज की बिल्डिंग से टकरा गया। इससे पहले विमान नारियल के पेड़ों से टकराया और फिर बिल्डिंग से टकराकर क्रैश हो गया।

हादसे में कई लोगों की मौत और घायल

यह घटना बेहद गंभीर थी, जिसमें अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मारे गए लोगों में एक छठी कक्षा का बच्चा भी शामिल है। 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के बाद घटनास्थल पर राहत कार्य जारी है, लेकिन आग की लपटों और धुएं के कारण राहतकर्मियों को अंदर घुसने में कठिनाई हो रही है। अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि विमान के पायलट को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया या नहीं।

फायर ब्रिगेड और आपातकालीन सेवाओं की तत्परता

जैसे ही हादसा हुआ, मौके पर फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और सुरक्षा एजेंसियों की टीमें पहुंची और आग पर काबू पाने की कोशिश की। ढाका के मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि की गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती किया गया था, लेकिन उसकी भी मौत हो गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक छठी कक्षा के बच्चे की भी मौत हो गई, जो घटना के समय कॉलेज में था।

बांग्लादेश सेना का बयान

बांग्लादेश सेना के जनसंपर्क कार्यालय ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि यह विमान बांग्लादेश वायुसेना का था, लेकिन घटना से जुड़ी कोई विस्तृत जानकारी अभी तक जारी नहीं की गई है। पायलट की स्थिति को लेकर भी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।

चीनी हथियारों पर सवाल

प्लेन एफ-7 फाइटर जेट एक चाइनीज एयरक्राफ्ट है। इससे पहले पाकिस्तान ने भी चीनी हथियारों के साथ ऑपरेशन सिंदूर में शर्मनाक हार का सामना किया था। पाकिस्तान ने चीन से प्राप्त एयर डिफेंस रडार और मिसाइलों का इस्तेमाल किया था, लेकिन भारतीय डिफेंस सिस्टम ने उन्हें नष्ट कर दिया था। इस ऑपरेशन ने साबित कर दिया कि चीन से प्राप्त कई हथियार और लड़ाकू विमान संकट के समय कुछ खास असर नहीं दिखा सके।

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ISIS-style Conversion: गोवा की आयशा ने यूपी में बांटे करोड़ों, आगरा के धर्मांतरण नेटव...

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ISIS-style Conversion: आगरा में धर्मांतरण का मामला धीरे-धीरे एक बड़े साजिश का रूप लेता जा रहा है। शुरुआत एक मामूली गुमशुदगी की जांच से हुई थी, लेकिन अब जो सच सामने आ रहा है, वह किसी को भी चौंका सकता है। पुलिस और ATS की संयुक्त जांच में सामने आया है कि यह मामला केवल एक साधारण धर्मांतरण का नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही भारत विरोधी साजिश का हिस्सा है। इसमें ISIS और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के पैटर्न का पालन किया जा रहा था, जिसमें बड़ी फंडिंग, फर्जी पहचान, और नाबालिग लड़कियों को ब्रेनवाश कर धर्म परिवर्तन के लिए तैयार किया जा रहा था।

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गुमशुदगी से खुली साजिश- ISIS-style Conversion

आगरा के एक परिवार की दो बहनों की गुमशुदगी से इस पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ। 24 मार्च 2025 को जब पुलिस ने जांच शुरू की, तो पता चला कि बड़ी बहन ने पहले भी 2021 में घर से भागकर कश्मीर जाने की कोशिश की थी। कश्मीर में उसे एक महिला सायमा से मुलाकात हुई थी, जिसने उसे इस्लाम की ओर आकर्षित किया। हालांकि, पुलिस ने समय रहते उसे वापस लाकर परिवार को सौंप दिया था। लेकिन चार साल बाद वह अपनी छोटी बहन को लेकर फिर लापता हो गई। इस बार दोनों को कोलकाता से पकड़ा गया।

आयशा उर्फ एसबी कृष्णा: नेटवर्क की फाइनेंसर

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि इस साजिश के पीछे गोवा की आयशा उर्फ एसबी कृष्णा का हाथ था। आयशा फंडिंग का काम देखती थी और कनाडा में बैठे सैय्यद दाऊद अहमद से आने वाली फंडिंग को भारत में बांटती थी। यह पैसे यूएई, लंदन और अमेरिका जैसे देशों से होकर भारत भेजे जाते थे, ताकि उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो सके। इसके अलावा, आयशा के पति शेखर राय उर्फ हसन अली कोलकाता से कानूनी मामलों को संभालता था, जैसे फर्जी पहचान पत्र बनवाना और नाम बदलने की प्रक्रिया।

धर्मांतरण के लिए नाबालिगों को बहलाना

इस साजिश में शामिल एक और प्रमुख किरदार मनोज उर्फ मुस्तफा था, जो नाबालिग लड़कियों को नई जिंदगी का सपना दिखाकर उन्हें बहकाता था। वह लड़कियों के लिए फर्जी पहचान पत्र और मोबाइल सिम कार्ड्स का इंतजाम करता था। इन लड़कियों को ट्रेन के बजाय बसों से भेजा जाता था, ताकि उनका ट्रैक करना मुश्किल हो सके। इन लड़कियों को उत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता, जहां उन्हें इस्लामी जीवनशैली अपनाने के लिए दबाव डाला जाता था।

प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप

इस साजिश में एक और नाम सामने आया है अब्दुल रहमान कुरैशी का, जो आगरा का रहने वाला था। वह यूट्यूब पर एक चैनल चलाता था और अपने पॉडकास्ट के जरिए इस्लामी कट्टरपंथ और हिंदू धर्म के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाता था। इसके अलावा, कोलकाता से गिरफ्तार ओसामा भी लड़कियों को इस्लामी बहन बनाने की ट्रेनिंग देता था।

पीड़ित परिवार की कहानी

इन घटनाओं के बाद पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी बड़ी बेटी, जो कभी नवरात्रि के व्रत रखती थी और देवी-देवताओं की पूजा करती थी, अचानक ही इस्लाम की ओर झुकाव महसूस करने लगी। वह हिजाब पहनने और पर्दा करने की बातें करने लगी और अपने परिवार को मूर्तिपूजक कहने लगी। इसके बाद वह अपनी छोटी बहन को लेकर भाग गई।

आतंकी लिंक और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग

पुलिस और ATS की जांच में यह भी सामने आया कि इस धर्मांतरण नेटवर्क का आतंकी संगठनों से भी संबंध है। विदेशों से आने वाली फंडिंग को आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता था। सोशल मीडिया पर जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब का इस्तेमाल करके हिंदू धर्म के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाया जाता था।

भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की साजिश

ATS अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ धर्मांतरण का मामला नहीं, बल्कि भारत को धीरे-धीरे इस्लामिक राष्ट्र बनाने की साजिश थी। इसके लिए खासकर युवाओं को टारगेट किया गया, उन्हें पैसे और नौकरी का लालच देकर इस नेटवर्क से जोड़ा गया। लड़कियों को विशेष रूप से टारगेट किया गया, ताकि उनका इस्तेमाल लव जिहाद और अन्य गतिविधियों के लिए किया जा सके।

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Agni V Bunker Buster Missiles: भारत की अग्नि-V मिसाइल ने उड़ाई पाकिस्तान की नींद, अग्...

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Agni V Bunker Buster Missiles: भारत और पाकिस्तान के बीच इस साल मई में हुई भीषण सैन्य संघर्ष ने दोनों देशों के रिश्तों में एक नया मोड़ लाया। इस दौरान भारत की ओर से दागी गई मिसाइलों के सामने पाकिस्तान बेबस नजर आया। अब पाकिस्तान में भारत की मिसाइल क्षमता को लेकर खौफ और बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत अपनी अग्नि-V बैलिस्टिक मिसाइलों को अब उच्च-शक्ति वाली पारंपरिक बंकर-बस्टर मिसाइल बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इससे पाकिस्तान की सेना और उसके अंडरग्राउंड ठिकानों पर खतरा और बढ़ सकता है।

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अग्नि-V की नई ताकत: बंकर-बस्टर मिसाइल- Agni V Bunker Buster Missiles

पाकिस्तान के प्रतिष्ठित अखबार डॉन ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अग्नि-V को परमाणु पेलोड के बजाय पारंपरिक 7,500 किलोग्राम के विशाल वारहेड से लैस कर रहा है। इस भारी वारहेड की खासियत यह है कि यह जमीन के अंदर 80-100 मीटर तक घुस सकता है और इसके बाद वह दबे हुए लक्ष्य को नष्ट करने की क्षमता रखता है। यह मिसाइल पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी बन गई है, क्योंकि इससे उनके अंडरग्राउंड ठिकाने और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया जा सकता है।

भारत का यह नया अग्नि-5 संस्करण पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के गहरे भूमिगत ठिकानों को निशाना बना सकता है। इसमें जिस तरह से बंकर-बस्टर बम की तरह जमीन के अंदर घुसने की क्षमता है, वही इसे और भी खतरनाक बनाता है। अमेरिका के GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) बंकर-बस्टर बम के समान, यह मिसाइल भारतीय सेना को लंबी दूरी से स्थित मजबूत और अंडरग्राउंड लक्ष्यों पर बिना चेतावनी के हमला करने की अनुमति देती है।

पाकिस्तान के लिए बढ़ती चिंता

पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत के इस नए कदम से उनकी सुरक्षा को बड़ा खतरा है। अगर भारत की यह मिसाइल अपनी क्षमता में सफल हो जाती है, तो पाकिस्तान की सेना और महत्वपूर्ण ठिकाने निशाने पर आ सकते हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान को यह चिंता भी है कि इस पारंपरिक बंकर-बस्टर के इस्तेमाल से भारत के परमाणु सिद्धांत यानी ‘पहले इस्तेमाल न करने’ (NFU) के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं होगा। भारत के लिए यह अहम है कि वह परमाणु हमला किए बिना पाकिस्तान के परमाणु बंकरों को बेअसर कर सके।

भारत के पास पहले से ही उच्च-प्रौद्योगिकी मिसाइल प्रणाली है, लेकिन पाकिस्तान के पास भौगोलिक रूप से सीमित शस्त्रागार और एक अलग परमाणु नीति है। पाकिस्तान ने अपनी परमाणु नीति में पहले परमाणु हथियार के इस्तेमाल के विकल्प को खुला रखा है, जो अस्तित्वगत खतरे से जुड़ा हुआ है। इसका मतलब यह है कि अगर भारत की ओर से कोई जबरदस्त पारंपरिक हमला होता है, तो पाकिस्तान इसे एक अस्तित्वगत खतरे के रूप में देख सकता है और प्रतिक्रिया में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है।

चीन और अमेरिका से सीखने की सलाह

पाकिस्तान के सैन्य और रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बढ़ती मिसाइल क्षमता के बीच, पाकिस्तान को अब अपनी सुरक्षा के लिए एक मजबूत रणनीति तैयार करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया है कि पाकिस्तान को चीन और अमेरिका से इस मामले में सीखना चाहिए। अमेरिकी सुरक्षा नीति को ध्यान में रखते हुए, जहां दूसरे विश्व युद्ध के बाद एहतियाती कदम उठाए गए थे, वहीं चीन ने पिछले कुछ दशकों में खुद को काफी मजबूत किया है। पाकिस्तान को इन दोनों देशों के अनुभव से सीखते हुए अपनी सुरक्षा नीति में बदलाव लाने की जरूरत है, ताकि इस बढ़ते खतरे का सामना किया जा सके।

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Marathi Hindi Controversy: मुंबई के घाटकोपर इलाके में एक नया विवाद सामने आया है, जो भाषा के मुद्दे पर शहर में बढ़ती बहस को और गरमा दिया है। हाल ही में एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग एक महिला को मराठी नहीं बोलने पर परेशान करते नजर आ रहे हैं। यह घटना न केवल समाज में भाषाई असहमति को उजागर करती है, बल्कि सार्वजनिक स्थलों पर भाषा के इस्तेमाल को लेकर चल रही बहस को भी तूल देती है।

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वायरल हो रहे इस वीडियो में एक महिला को कुछ लोग घेरते हुए दिखाई दे रहे हैं, जो उस पर मराठी में बात करने का दबाव बना रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब महिला अपने घर के पास खड़ी थी। तभी एक ग्रुप ने उसका रास्ता रोक लिया और उसे मराठी में बात करने के लिए मजबूर करने लगे। महिला के मना करने के बाद, बहस शुरू हो गई और हालात और बिगड़ने लगे।

“यह महाराष्ट्र है, मराठी बोलो” – Marathi Hindi Controversy

वीडियो में एक व्यक्ति महिला के पास पहुंचकर आक्रामक तरीके से उंगली उठाता हुआ चिल्लाते हुए कहता है, “यह महाराष्ट्र है, मराठी बोलो!” इसके बाद, ग्रुप के बाकी लोग भी उसे जोर-जोर से मराठी में बात करने के लिए कहने लगते हैं। इस तरह की मानसिकता ने न केवल महिला को अपमानित किया, बल्कि सामाजिक सौहार्द्र को भी नुकसान पहुँचाया।

“तुम हिंदुस्तानी नहीं हो क्या?”

महिला ने अपनी भाषाई स्वतंत्रता का उल्लंघन होते हुए देखा और उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, “मैं मराठी नहीं बोलूंगी, आप हिंदी में बात करते हैं।” महिला ने फिर जवाब देते हुए पूछा, “आप भारतीय नहीं हो क्या? क्या आप हिंदुस्तान से नहीं हैं?”

भीड़ और पुलिस का हस्तक्षेप

इस बहस के दौरान, वहां मौजूद लोग भी जमा हो गए और पुलिस को सूचित किया गया। हालांकि, पुलिस के आने से पहले ही महिला से बहस करने वाले लोग वहां से निकल चुके थे। इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े किए हैं, जिनमें प्रमुख यह है कि सार्वजनिक जगहों पर भाषाई असहमति के मुद्दे को किस तरह से संभाला जाना चाहिए और क्या यह हमारे नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है?

सोशल मीडिया पर तीव्र प्रतिक्रियाएं

इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तीव्र प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। जहां एक ओर कुछ लोग महिला के खिलाफ इस उत्पीड़न की निंदा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे मराठी भाषा के सम्मान और स्वाभिमान से जोड़कर देख रहे हैं। यह घटना भाषा को लेकर होने वाले विवादों को और ज्यादा उजागर करती है और इस पर बहस को हवा देती है कि क्या सार्वजनिक जीवन में भाषा की विविधता को समझा और स्वीकारा जा सकता है, या फिर यह एक जबरदस्ती की स्थिति बन जाएगी?

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